Tuesday, April 14, 2020

बाल कहानी - सूजी और पोपो का जन्मदिन



उपासना बेहार
Image Courtesy-Google.com


घूंधराले वालों वाली सूजी एक प्यारी सी बच्ची थी। वह कक्षा 4 में पढ़ती थी। वह रोज स्कूल से आने के बाद पड़ोस में रहने वाले अपने दोस्त अकबर के घर जाती थी और दोनो अकबर की छोटी सी साईकल में बैठ के पास के पार्क में खेलने जाते थे। वहां आसपास के ओर बच्चे भी खेलने आते थे। सूजी बहुत मिलनसार और हंसमुख थी इस कारण सभी बच्चे उसके दोस्त हो गये थे।

एक दिन सूजी पार्क जाने के लिए अकबर के घर गई तो देखा कि अकबर के हाथ में सफेद रुई जैसा कुछ चीज था। उसने अकबर से पूछा कि “ये क्या है” तब अकबर ने उस चीज को उसके हाथ में रखा, “अरे ये क्या ये तो बिल्ली के 2 छोटे बच्चे हैं”। सूजी आश्चर्य से उन बच्चों को देख रही थी, बच्चे बहुत ही सुंदर और नाजुक थे, इतने छोटे बिल्ली के बच्चों को उसने पहली बार देखा था और वो दोनों धीरे धीरे मियाऊॅ-मियाऊॅ की आवाज निकाल रहे थे।

सूजी ने पूछा “ये तुम्हें कहां से मिले”.
“मेरे अब्बा लाये हैं”
“कितने प्यारे हैं ये, काश मेरे पास भी ये होते” सूजी दुखी हो कर बोली। अकबर ने कहा “इन दोनों बच्चों की मम्मी मर गई है तो मेरे अब्बा इन्हें घर ले आये और इनमें से एक बच्चा तुम रख सकती हो, ये तुम्हारे जन्मदिन का गिफ्ट है।कुछ दिनों बाद ही सूजी का जन्मदिन आने वाला था। “सच में, मैं अभी घर जा कर मां को इसे दिखाती हूँ”. सूजी खुशी से चहक उठी और बिल्ली के बच्चे को लेकर घर की ओर दौड़ लगा दी।

“मम्मी देखो अकबर ने जन्मदिन में मुझे बिल्ली का बच्चा गिफ्ट दिया”. मम्मी ने उसके हाथ में सफेद सा छोटा सा बिल्ली का बच्चा देखा। सूजी खुशी में कहे जा रही थी “मम्मी हम इसका नाम पोपो रखेगें। देखो ये कितना प्यारा है।“ “हाँ सूजी,ये तो बहुत सुंदर हैं लेकिन हमें इसकी अच्छी तरह से देखभाल करनी होगी”. मम्मी ने तुरंत पोपो के लिए एक बक्सा में कपड़े और रुई लगा कर घर बना दिया और उस बॉक्स को सूजी के कमरे में रख दिया. सूजी पोपो के साथ खेलने में लग गई। शाम में पापा जब घर आये तो सूजी ने उन्हें अपना नया दोस्त पोपो दिखाया। मम्मी और पापा ने सूजी को इतना चहकते हुए कभी नही देखा था। वो भी खुश हुए कि घर में कोई ओर बच्चा ना होने की वजह से सूजी अकेले बोर हो जाती थी पर अब तो उसके पास उसका सबसे अच्छा दोस्त पोपो आ गया था।

दूसरे दिन वो पार्क में अपने साथ पोपो को ले गई। सभी बच्चों से उसे मिलवाया। सभी बच्चों ने इतना छोटा बिल्ली का बच्चा नही देखा था। वे पोपो को देख कर खुश हो गये। सब उसे गोद में लेने को बैचेन हो रहे थे। तब तय हुआ कि सभी बच्चे बारी बारी से पोपो को पकड़ेगें। रोज सूजी पोपो को अपने साथ पार्क ले जाने लगी। पोपो सभी बच्चों का चहेता बन गया था।

सूजी के जन्मदिन को एक दिन बाकी था, मम्मी ने सूजी से कहा कि वह आज पार्क में जाकर सभी दोस्तों को कल उसके जन्मदिन के लिए न्यौता दे आयेगी। उसने पार्क जा कर सभी दोस्तों को जन्मदिन में आने का न्यौता दिया। तब एक बच्ची ने कहा सूजी हमें पोपो का जन्मदिन भी मनाना चाहिए।सूजी सोच में पड़ गई।

वह घर गई और मम्मी से कहा मम्मी मेरे जन्मदिन के दिन पोपो का भी जन्मदिन मनायेगें। मम्मी उसकी बात सुन कर हँस पड़ी और कहा “जानवर का भी कोई जन्मदिन होता हैं”. “मम्मी अगर हमारा जन्मदिन हो सकता है तो जानवरों का क्यों नही? वैसे भी पोपो जानवर नही है वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त हैं।सूजी दुखी हो गई। तब मम्मी ने कहा “ठीक है हम तुम्हारे जन्मदिन के साथ साथ तुम्हारे प्यारे दोस्त का भी जन्मदिन मनायेगें। सूजी ने खुश होकर कहा “थैंकयू मम्मी”.

सूजी का आज जन्मदिन था। शाम में मेहमानों का आने का समय आ गया। सूजी ने सबसे पहले पोपो के बालों में कंघी की,गले में लाल रंग का रिबन बांध कर उसे तैयार किया और फिर मम्मी ने सूजी को तैयार किया। सूजी तो पूरी गुडि़या लग रही थी। धीरे धीरे सभी दोस्त आ गये। अब केक काटने का समय आ गया था। टेबल में एक बड़ा और एक छोटा केक का डब्बा रखा था। सब सोच रहे थे कि आज तो सूजी का जन्मदिन है लेकिन ये दो केक क्यों लाये गये हैं?

केक काटने का समय आ गया। सभी बच्चों ने कहा “अंकल आज तो केवल सूजी का जन्मदिन है फिर ये छेाटा वाला केक किसके लिए है? सूजी के पापा ने कहा “बच्चों अभी थोड़ी देर में पता चल जायेगा तब तक सूजी बड़े वाले केक को काटेगी। सूजी ने केक को काटा और सबने तालीयां बजायी। फिर छोटा केक खोला गया जिसमें लिखा था जन्मदिन की बधाई पोपो। याने आज पोपो का भी जन्मदिन मनाया जा रहा है। सभी बच्चे बहुत खुश हुए और बच्चों ने पोपो को भी जन्मदिन की बधाई दी और दो दो केक खाने के मजे लिए। पोपो भी मियाऊ मियाऊ करता बच्चों के आसपास घूमता रहा.


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