Wednesday, April 15, 2020

बाल कहानी - सोनू के समोसे


       
उपासना बेहार
Image Courtesy - Google.com


सोनू सुलोनी नामक गाँव में रहता था। वह कक्षा पांच में पढ़ता था। वह रोज अपने घर से स्कूल पैदल आता जाता था। एक दिन जब वह स्कूल से घर जा रहा था तो रास्ते में उसे कुछ चमकती चीज दिखायी दी। उसने पास जा कर देखा ‘अरे ये तो 5 रुपये का सिक्का है’, उसने सिक्के को उठा लिया और धूल साफ की। सोनू सिक्के को देख कर बहुत खुश हो गया। वह सोचने लगा कि इन रुपयों का क्या करेगा, उससे क्या खरीदेगा, वैसे 5 रुपये बहुत बड़ी रकम नही होती है, जिससे बहुत कुछ खरीदा जा सके लेकिन उसके लिए तो यह बहुत बड़ी बात है, उसे तो खर्च के लिए रोज केवल 1 रुपये ही मिलते हैं, कितनी सारी चीजें है जो वो दुकान से खरीद कर खाना चाहता है पर पैसे ना होने के कारण खरीद नही पाता है। आज तो वह अमीर हो गया है। उसने सोचा क्यों ना इस पैसे से कुल्फी खरीदी जाये, पर आधी कुल्फी तो खाते समय यू ही पिघल कर खत्म हो जायेगी। नही नही ये आइडिया ठीक नही है।"

तभी उसे रहमत चाचा की समोसे की दुकान की याद आई, ‘कितनी बार चाचा की दुकान पर खड़ा हो कर वह समोसा को बनते देखता है, चाचा कितने अच्छे समोसे बनाते हैं, पूरे गाँव में चाचा के समोसे फेमस हैं, उसकी खुशबू दूर से आती है, खाने का बहुत मन करता है लेकिन पैसे नही होने के कारण वह उन्हें दूर से देख कर ही चला जाता है। उसने एक बार चाचा से बहुत जिद की थी कि उसे भी समोसा बनाने दे लेकिन जैसे ही लोई हाथ में ली, वो तो उसके हाथ में चिपक गई, दूसरे हाथ से निकालने की कोशिश की तो दूसरे हाथ में भी चिपक गई। दुकान में जितने लोग थे सब हंसने लगे, उसे कितनी शर्म आयी थी। तब रहमत चाचा ने कहा था “बेटा तुम्हारा काम तो खूब मन लगा कर पढ़ना हैं और बड़ा अफसर बन कर गाँव का नाम रोशन करना हैं, समोसा बनाने का काम तो हम अनपढ़ लोगों का है”. समोसे के बारे में सोचते ही उसके मुहॅ में पानी आ गया। वह तेजी से दौड़ कर रहमत चाचा के दुकान पंहुचा , वहाँ गरम गरम समोसे तले जा रहे थे,उसने दुकान से एक समोसा खरीदा और घर की ओर चल दिया, उसने सोचा रास्ते में समोसा खाते हुए जायेगा तो रास्ता भी जल्दी कट जायेगा।

वह अभी दो कदम ही आगे बढ़ा था कि देखा गाँव के भिखारी बाबा एक आदमी से कह रहे थे बेटा मुझे बहुत भूख लगी है। कुछ पैसे दे दोलेकिन उस आदमी ने बुढ़े लाचार बाबा को जोर से फटकार लगा कर भगा दिया। भिखारी बाबा के उदास चेहरे को देख कर सोनू को बहुत दुख हुआ। एक बार उसने अपने समोसे को देखा जिसे खाने को वह कब से बेकरार था फिर बाबा की ओर देखा। उसने सोचा मैं तो घर जा कर मां के हाथ का खाना खा लूँगा, समोसा फिर कभी खा लूँगा अभी बाबा को इसकी ज्यादा जरुरत है।“ वह दौड़ कर बाबा के पास गया "बाबा आप ये समोसा खा लिजिये", यह कह कर उसने वह समोसा बाबा को दे दिया और घर की ओर दौड़ पड़ा। अब उससे भूख बर्दाश्त नहीं हो रही थी.
          

0 comments:

Post a Comment

Popular Posts

 
मटरगश्ती Copyright © 2012 Design by Ipietoon Blogger Template