उपासना बेहार
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गोपी नाम का एक लड़का था। वह बड़ा ही पेटू था। इसके
कारण मौहल्ले में वह गोपी पेटू के नाम से जाना जाता था। जब भी कही वह खाने की कोई चीज
देखता तो उसके मुँह से लार टपकने लगता। उसके
मम्मी-पापा उसके इस पेटूपन से बहुत परेशान थे। गोपी के मम्मी-पापा उसे अपने साथ बाजार
ले जाने से डरते थे। बाजार में खाने की चीज दिख जाये तो गोपी उसे खरीदने की जिद करने
लगता।
आसपड़ोस में किसी के घर में कोई खाने की अच्छी चीज
बन रही हो तो उसकी खुशबु न जाने कैसे गोपी पेटू के नाक तक पहुंच जाती थी और फिर वह
उस घर के आसपास मंडराने लगता था। सभी अड़ोसी पड़ोसी उसके इस पेटूपन के बारे में जानते
थे इस कारण उसे अपने घर किसी फंग्शन में बुलाने से डरते थे।
गोपी पेटू के घर के पड़ोस में आशा मौसी रहती थीं।
वह हर साल अपने मृत बेटे के जन्मदिन के दिन मिठाई, नमकीन और खिलौने ले कर सुबह से ही पास के अनाथालय चली जाती थीं
और वहाँ बच्चों के साथ अपना सारा दिन गुजारती थीं। इस साल भी मौसी ने एक रात पहले ही
लड़डू बना कर रख लिए थे। मिठाई की खुशबु से गोपी के मुंह में पानी आ गया और वह अपने
आप को रोक नही सका और रात में चुपचाप उठा और दिवार फांद कर मौसी के किचन में घूस गया। वहाँ डब्बे में लड़डू
रखी हुई थी, उसके मुँह से तो लार टपकने लगा, लेकिन उसके मन ने कहा ‘किसी के घर इस तरह चोरी से घूसना और चोरी करना गलत बात है।’
लेकिन लड़डू की खुशबु से उसे अब कंट्रोल करना मुश्किल
हो रहा था। उसने सोचा इतने सारे लड़डू है मैं केवल दो-चार लड़डू ही तो खाऊॅगा, मौसी को पता नही चलेगा लेकिन जब वह लड़डू खाने बैठा तो धीरे धीरे
करके सारे के सारे लड़डू खा गया। सुबह जब मौसी तैयार हो कर किचन आयी तो वहाँ लड़डू का
डब्बा तो रखा था लेकिन उसका ढ़क्कन खुला था और सारे लड़डू गायब थे। वो परेशान हो गयीं
कि आखिर लड़डू गये कहाँ तभी उन्हें ध्यान आया कि ‘उनके और गोपी पेटू के घर के बीच केवल एक दिवार का फासला है।
कही ऐसा तो नही है कि गोपी रात में आ कर लड़डू चुरा के ले गया हो, वो तुरंत गोपी के घर गई और उसकी मां को लड़डू चोरी होने का किस्सा
सुनाया और साथ ही बड़ी विनम्रता से अपनी शंका भी जाहिर की। मां ने गोपी को आवाज लगायी
‘बेटा जल्दी बाहर आओ’ ‘क्या है मम्मी क्यों बुला रही हो’ यह कहते हुए जब गोपी अपने कमरे से बाहर आया तो आशा मौसी को देख
कर सकपका गया।
‘बेटा मौसी ने कल रात को लड़डू बनाये थे लेकिन आज
सुबह लड़डू गायब थे, लगता है किसी ने लड़डू खा लिया है, क्या उसे तुमने खाये हैं’ ‘नही मां मैंने तो नही खाये और मुझे तो पता ही नही था कि मौसी
के घर लड़डू बने हैं। कहीं बिल्ली तो नही खा गई।‘ गोपी साफ झूठ बोल गया। मौसी ने कुछ नही कहा लेकिन उन्हें पूरा
विश्वास था कि लड़डू तो गोपी पेटू ने ही चुरा कर खाये हैं लेकिन उनके पास कोई सबूत नही
था। लड़डू इतने सफाई से खाये गये थे कि चोरी का कोई नामोनिशान नही था। वो अपने घर वापस
आ गई और दुखी मन से पुनः नये लड़डू बना कर अनाथ आश्रम चली गई।
कुछ दिनों बाद गोपी के घर के पड़ोस में रहने वाले
राधेश्याम बाबा के घर शहर से उनके पक्के दोस्त आने वाले थे। उनके दोस्त को समोसे बहुत
पंसद थे इसलिए राधे बाबा बड़े मन से अपने दोस्त के लिए पास की दुकान से समोसे खरीद के
लाये। गोपी ने उन्हें समोसे लाते देख लिया और उसका मन समोसे खाने को ललचाने लगा। राधे
बाबा समोसा घर में रख कर अपने दोस्त को लेने चले गये। घर का दरवाजा खुला देख कर गोपी
पेटू चुपचाप उनके घर घूस गया और आधे समोसे चुरा कर घर के पास वाले पार्क में गया और
वहाँ आराम से बैठ कर सारे समोसे सफाचट कर गया।
राधेश्याम बाबा अपने दोस्त को लेकर घर आये, थोड़ी देर में वो समोसे लेने के लिए किचन गये लेकिन वहाँ समोसे
तो आधे रह गये थे। उन्होनें अपनी पत्नि से पूछा ‘मैं तो 10 समोसे लाया था लेकिन यहाँ तो केवल 5 समोसे ही बचे
हैं बाकि के समोसे आपने खाये हैं क्या’ ‘नही तो’ ‘फिर समोसे गये कहाँ?’ ‘क्या मेरे जाने के बाद घर का दरवाजा खुला था’ ‘हाँ’ तभी उन्हें गोपी पेटू की याद आयी। उन्होनें मन ही मन सोचा ‘हो ना हो गोपी ने समोसे चुराये होगें।’
दोस्त के चले जाने के बाद वो गोपी के घर गये और
उनकी मां को अपने घर से समोसे चोरी की घटना के बारे में बताया। गोपी की मां ने कहा
‘गोपी तो घर में नही है, वह तो पार्क खेलने गया है।’इतने में गोपी पार्क से समोसे खा कर घर आया। ‘लो गोपी आ गया, अभी ही इससे पूछ लेते हैं। बेटा क्या तुमने राधे बाबा के घर
से समोसे चुराये हैं?’ ‘नही मां मैं तो पार्क में था’ ‘फिर उनके घर से समोसे कहाँ गायब हो गये’ ‘मुझे क्या पता, जब भी किसी के घर से खाने की कोई चीज गायब होती
है तो मेरा ही नाम लगाते हो’ गोपी रोते हुए कहने लगा। ‘अरे रोओ नही बेटा, हो सकता है कोई ओर खा लिया होगा।’यह कह कर राधे बाबा अपने घर वापस आ गये लेकिन उन्हें अब भी गोपी
पर ही शक था।
आये दिन लोगों के घर से खाने के सामान गायब होने
लगे लेकिन चोर बहुत शातीर था। लोग उसे पकड़ नही पा रहे थे। गोपी को धीरे धीरे चोरी करने
की आदत पड़ गई थी। जब भी कोई उसके घर आ कर खाने की चोरी की शिकायत करता तो वह हमेशा
कोई न कोई झूठ बोल देता।
पूरा मौहल्ला गोपी की इस चोरी करने और झूठ बोलने
की हरकत से त्रस्त हो गया था। आखिर लोगों ने परेशान हो कर गोपी को सबक सिखाने की सोची।
एक दिन गोपी के पड़ोसी पूरणचंद्र ने अपने घर में
जलेबियां बनवायी और उसमें दस्त कराने वाली गोली मिला दी फिर अपने घर के किचन की खिड़की
खोल दी और आराम से सोने चले गये। पेटू गोपी तो शाम से ही जलेबी चुराने के फिराक में
था परन्तु उसे मौका नही मिल रहा था। रात में वह चुपचाप खुली खिड़की से पूरणचंद्र के
घर घूस गया और किचन में ही आराम से बैठ कर सारी जलेबी खा गया। उसके बाद घर आ कर आराम
से सो गया। सुबह पूरणचंद्र उठते ही सबसे पहले किचन गये, चोर सारी जलेबी खा गया था।
पूरणचंद्र ने मोहल्ले के सभी लोगों को इक्टठा किया
और जलेबी चोरी की घटना बतायी। उन्होनें कहा ‘हमारे मोहल्ले में घरों से आय दिन खाने के सामान की चोरी हो
रही है। लेकिन चोरी करने वाला बहुत सफाई से चोरी करता है। वह चोरी के बाद अपने पीछे
कोई भी निशान छोड़ता नही है, इतना तो पक्का है कि चोरी करने वाला हमारे ही मोहल्ले का
है क्योंकि किसी के घर में भी स्वादिष्ट पकवान बनता हैं तो उसकी खबर झट से उसे लग जाती
है। इसलिए इस चोर को पकड़ने के लिए मैंने एक योजना बनायी थी। कल मैंने घर में जलेबियां
बनवाई और उसमें दस्त की गोली मिला दी थी। चोर जलेबी खायेगा और दस्त की गोली अपना कमाल
दिखायेगी। मोहल्ले के जिस किसी ने भी चोरी से वो जलेबियां खायी होगीं उसे सुबह से दस्त
की समस्या हो रही होगी और वही हमारा चोर है। तब वहाँ खड़े लोगों में से किसी ने कहा
कि ‘गोपी को तो सुबह से दस्त
हो रहे हैं। सभी तुरंत गोपी के घर की ओर चल पड़े।
गोपी की मां परेशान सी बैठी थी ‘क्या हुआ चाची,आप इतनी परेशान क्यों हैं।’ ‘क्या बताऊ बेटा, सुबह से गोपी को लगातार दस्त हो रहे हैं।‘
‘चाची उसने कल मेरे घर से जलेबी चोरी करके खायी
थी यह उसी का नतीजा है। पूरणचंद्र ने कहा, ‘क्या मतलब मैं समझी नही।’
‘अभी सब पता चल जायेगा चाची।’
तभी बाथरुम से गोपी निकला। ‘क्या तुमने कल पूरणचंद्र के घर से जलेबी चुरा के खायी थी’ आशा मौसी ने पूछा, ‘नही मौसी मैंने कोई चोरी नही की।’
‘गोपी अब झूठ बोलने से कोई फायदा नही होगा।’ और
पूरणचंद्र ने अपनी योजना के बारे में बताया।
साथ आये सभी लोगों ने कहा कि गोपी को चोरी करने
की आदत पड़ गई थी और हम सब इसके इस व्यवहार से परेषान थे हमें यह सब करना पड़ा।
यह सुन कर गोपी बहुत शर्मिदा हुआ और उसने खाने
के चोरी की बात कबूल की और सभी से माफी मांगी और कहा कि वह सबसे वादा करता है कि आगे
से ना तो वह कभी चोरी करेगा और ना ही कभी झूठ बोलेगा। मोहल्ले के लोगों ने भी वादा
किया कि किसी के घर भी कोई पकवान बनेगा तो वे गोपी के लिए भी रखेगें।

Prerak katha ...looking fo rthe next one ..amities
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