उपासना
बेहार
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| Image Courtesy -Google.com |
एक घने जंगल में मोनू नाम का गेंडे का बच्चा रहता था। उसे अपने बड़े और मजबूत
शरीर को लेकर बहुत घमंड़ था। वह जंगल में सबसे कहता फिरता “मैं
सबसे बड़ा हूँ और तुम सब से बलवान हूँ, लेकिन जंगल के सभी जानवर
उसे समझाते थे कि “घमंड करना अच्छी बात नही है। कभी तुम किसी मुसिबत में फंसोगे तो
कोई तुम्हारी मदद करने नही आयेगा”. तब वह कहता “मुझे किसी की मदद की जरुरत ही नही
पड़ेगी”।
एक दिन शिकारी ने जंगल में हिरणों के जाने के रास्ते में गहरा गडढ़ा खोदा और उसे
पत्तियों से ढंक दिया, खुद पास में छुप गया। कुछ देर बाद उसे एक जानवर के आने की
आवाज आयी। वो खुश हो गया कि आज तो जरुर कम से कम एक हिरण इस गडढ़े में गिरेगा। वो
आवाज हिरण की नही मोनू गेंड़े की थी जो उसी रास्ते से अपने घर की तरफ जा रहा था।
मोनू अपनी मस्ती में चला जा रहा था, उसे पत्तियों से ढंका गडढ़ा
दिखायी नही दिया और वो उसमें गिर गया। गिरने की आवाज सुन कर शिकारी गडढ़े के पास
आया, वहां उसे गेंड़े का बच्चा गिरा दिखा। उसने सोचा हिरण ना सही इसी से कमाई हो
जायेगी लेकिन इतने भारी गेंड़े को अकेले निकालूँगा कैसे ? तब शिकारी अपने दोस्तों को लेने चला जाता है.
गडढ़े में गिरने से मोनू के पैर में चोट आ जाती है. भारी शरीर होने के कारण वह
गडढ़े से निकल नही पा रहा था। उसे डर लगने लगा शिकारी कभी भी आ सकता है। वह मदद के
लिए जोर जोर से आवाज लगाने लगता है। तभी उधर से चिकू चूहा निकलता है। उसे गडढ़े
में से मोनू की आवाज सुनायी देती है। वो तेजी से गडढ़े के पास जाता है। ‘अरे मोनू तुम गडढ़े में कैसे गिर गये’ , तब मोनू उसे शिकारी के
बारे में सारा किस्सा सुनाता है और रोते रोते कहता है कि 'चिकू मेरे पैर में भी चोट
आयी है। इस कारण मैं खड़ा भी नही हो पा रहा हूॅं। मुझे जल्दी यहाॅ से निकालें। शिकारी दोस्तों को लेकर बस आता ही होगा। चिकू कहता है ‘तुम रोओ मत। मुझे कुछ उपाय सोचने दो। सबसे पहले तो उन शिकारियों को तुम्हारे
पास तक आने से रोकना है। उसके बाद तुम्हें यहाॅ से निकालना होगा।’
चिकू तुरंत जगंल में जाता है और अपने सभी दोस्तों को बुलाता है। उन्हें सारा
किस्सा सुनाता है और मोनू को गडढ़े से निकालने में मदद मांगता है। तब मिकू चूहा
कहता है ‘चिकू ये मोनू हम सब की कितनी खिल्ली उड़ाता है, कहता है तुम लोग इतने छोटे और कमजोर हो कि तुम्हे तो कभी भी मैं अपने पैरों के
नीचे कुचल कर मार सकता हूॅ।’ चिकू कहता है "हमें उसकी मदद करना चाहिए। ये बातें नही सोचनी चाहिए।"
चिकू अपनी योजना बताता है "दोस्तों हममें से 3 साथी पट्टी और दवाई लेकर मोनू के पास जायेगें। बाकि सारे साथी शिकारियों के
आने के रास्ते में तैनात रहेगें जैसे ही शिकारी आते दिखेगें, सब उन पर आक्रमण कर
देगें। मैं भोला हाथी के पास मदद के लिए जाता हूॅ। मोनू को उनके अलावा ओर कोई
गडढ़े से निकाल नही सकता है।" चिकू तेजी से भोला हाथी
को लेने निकल पड़ा। बाकि सभी योजना के अनुसार अपने काम में लग जाते हैं।
थोड़ी देर में शिकारी अपने दोस्तों के साथ गडढ़े की ओर आता दिखता है तभी अचानक
चूहों की फौज उन पर हमला बोल देती है, शिकारी और उसके दोस्त इस हमले से घबरा कर भाग खड़े हो जाते हैं।
इधर 3 चूहों ने जाकर मोनू के चोट पर दवा पट्टी लगा दी थी तभी चिकू अपने साथ भोला हाथी
को ले आता है। वो अपनी सूंड का सहारा देकर मोनू को गड़ढे से निकाल लेता है। मोनू
मदद करने के लिए सबको धन्यवाद देता है। उस दिन के बाद से मोनू सबके
साथ मिल कर रहने लगा।

वाह बढ़िया कहानी
ReplyDeletethanku
DeleteWell-done
ReplyDeleteशुक्रिया
DeleteGreat going
ReplyDeleteregards
Shaheen
शुक्रिया आपका
Delete𝔾𝕠𝕠𝕕 𝕟𝕠𝕥 𝕓𝕒𝕕
ReplyDeletedhanyvaad
DeleteGreat ..Cheeku Chuha is so nice to have helped Monu ... nice story ..best wishes Upasana
ReplyDeletethanku
Deleteदीदी आप की कहानी बहुत अच्छी लगी.
ReplyDeleteआप शेर और चूहे की कहानी भेज दो-
Aapki chhoti dost -shivi
shykriya dost
DeleteVery good story.
ReplyDeleteshukriya
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