Thursday, July 9, 2020

बाल कहानी - मछली चाची और तपन


उपासना बेहार
Image Courtesy- Google.com 

तपन एक लड़का था जो पढ़ने में आलसी था। उसके घर वाले उसे पढ़ने के लिए कहते लेकिन वह किसी की नही सुनता. उसकी छः माही परीक्षा का समय भी पास आ रहा था। एक दिन उसके पापा ने उसे समझाते हुए कहा तुम दिनभर खेलते रहते हो, जबकि अगले महीने तुम्हारी परीक्षा है, तुम्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।तपन चुपचाप सुनता रहा और गुस्से में घर से निकल कर पास बह रही नदी के किनारे जा कर बैठ गया और अपने आप से बड़बड़ाने लगा सभी मुझे डांटते हैं, कोई मुझसे प्यार नही करता है, कोई खेलने नही देता है। सब पढ़ो-पढ़ो की रट लगाते रहते हैं। परीक्षा को तो एक महीने हैं, अभी से चिंता करने की क्या जरुरत।

तभी नदी में से एक बड़ी मछली निकलती है। उसे देख तपन डर कर भागने लगता है तब मछली कहती है बेटा डरो मत तुम्हें उदास देख कर ही मैं बात करने बाहर आयी हूँ, तुम्हारी उदासी का कारण क्या है?’ तपन ने हिम्मत करके कहा मछली चाची मुझे खेलना अच्छा लगता है लेकिन घर वाले मुझे खेलने नही देते, बार बार पढ़ने को कहते है जबकि मेरी परीक्षा 1 महीने बाद है, मैं तो 15 दिन में ही पढ़ कर पास हो जाऊॅगा। इतने पहले पढ़ने से क्या फायदा।

ये सुन कर मछली चाची कहती हैं आओ मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूँ।’  नदी के पास एक पेड़ की ओर इशारा करते हुए वो कहती हैं क्या तुम्हें उस पेड़ की टहनी पर एक चिडि़या कुछ करती दिखायी दे रही है?’  तपन ने कहा हाँ वो अपना घोसला बना रही है।मछली ने कहा तुमने सही कहा, असल में ये पक्षी ठंड में अंड़े देती है, इसलिए ये तिनके इक्टठे कर अपना घर बना रही है।तपन ने कहा पर ठंड आने में तो अभी 2 माह हैं और पक्षी को बड़ा घर तो बनाना नही है कि उसके लिए इतना समय लगे।चाची ने कहा तुम्हारी बात ठीक है इसे घर बनाने में ज्यादा समय नही लगता है चाहे तो वह ठंड शुरु होने के 10 दिन पहले भी ये काम कर सकती है पर तुम ही बताओ हड़बड़ी में क्या वो इतना मजबूत घर बना सकती है।’  तपन ने कहा नहीमछली चाची ने कहा इसी प्रकार तुम भी पढ़ाई तो 15 दिन में कर लोगे लेकिन क्या वो तुम्हें अच्छे से समझ आयेगा और आगे के लिए याद रहेगा।तपन चुपचाप उनकी बात सुनता है और अपने घर की ओर चल देता है। 

मछली चाची की बतायी बात से भी उसे कोई फर्क नही पड़ता। घर वाले भी उसे पढ़ने के लिए बोलना बंद कर देते हैं। परीक्षा में कुछ ही दिन बचे होते हैं। तपन अब परीक्षा की तैयारी शुरु करता है। पर उसे पाठ समझने में परेशानी आती है। परीक्षा का दिन भी आ जाता है पर तब भी उसका कोर्स कम्पलीट नही होता है। उसे घबराहट होने लगती है,पर अब वो कुछ नही कर सकता। किसी तरह परीक्षा देता है। जब रिजल्ट आता है तो वह फेल हो जाता है। 

वो रोते रोते उसी नदी के पास जाता है और मछली चाची को आवाज लगाता है, मछली चाची उसकी आवाज सुन कर बाहर आती है। उन्हें देखते ही तपन रो रो कर कहता है चाची मैंने फेल हो गया। मुझे आपकी बात समझ में आ गयी. मैंने न अपने घरवालों और न ही आपकी बात पर ध्यान दिया मुझे समझ आ गया कि जितना खेलना जरुरी है उतना पढ़ना भी जरुरी है. दोनों में तालमेल बना कर रकहना चाहिएमछली चाची उसे प्यार करते हुए कहती हैं चलो अब सब भूल कर वार्षिक परीक्षा की तैयारी करो और हाँ केवल पढ़ाई ही मत करना उसके साथ साथ खेलने के लिए भी समय रखना। तभी ओर अच्छे से पढ़ पाओगें।तपन ने मन ही मन ठान लिया कि वह अब रोज खेलेगा भी और पढ़ाई भी करेगा. 


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