उपासना बेहार
पेंच के घने जंगल में एक खतरनाक
गिद्ध रहता था. उसे दूसरों को सताने और दुःख देने में मजा आता था. कभी भी वो छोटे
जानवरों के बच्चों को यू ही उठा के ले जाता और उन्हें खाता नहीं बल्कि मार कर फेंक देता था.
सारे जानवर परेशान थे, लेकिन उसके नुकीले पंजे से डरते थे. उस जंगल में एक खरगोश
रहती थी. उसके 3 छोटे बच्चे थे, उन बच्चों के बाल रुई जैसे मुलायम और एकदम सफ़ेद
थे, जो भी जानवर उन्हें देखता प्यार और दुलार जरुर करता.
एक दिन जब गिद्ध आसमान पर
उड़ रहा था तो उसने देखा कि खरगोश माँ बच्चों के लिए खाना लेने जा रही है और अपने
बच्चों को घर से बाहर ना निकलने की हिदायत दे रही है. बच्चों को समझा कर माँ चली जाती
है. गिद्ध के दिमाग में उत्नेपात करने की सुझी, उसने सोचा ये सही समय है बच्चों को
मारने का.
वो अभी सोच ही रहा था कि कैसे इन बच्चों को उनके घर से निकाले तभी एक बच्चा
जमीन के अंदर बने अपने घर से बाहर निकलता है. वो बच्चा गिद्ध को देखता है. बच्चे
की आँखें हैरानी के कारण फैल जाती हैं. इतना बड़ा पक्षी और इतने बड़े पंख कभी नहीं देखे
थे. उसे डर लगने लगता है, वो जल्दी से वापस घर जाने को मुड़ता है कि गिद्ध अपने भारी
और नुकीले पंजों से उस बच्चे को मारता है जिससे बच्चा मर जाता है और गिद्ध उड़ जाता है. जब खरगोश माँ घर आती है तो
देखती है कि केवल दो ही बच्चे हैं, तीसरे
बच्चे को वो ढूंढती है तो वो पास में ही मरा हुआ मिलता है. खरगोश माँ के आँख में आसू आ जाते है. उसे शक होता है कि हो न हो ये उसी उत्पाती गिद्ध का काम होगा.
कुछ दिनों बाद उसी जंगल में
रहने वाले कबूतर के बच्चे घोसले से गायब हो जाते हैं, जब कबूतर अपने बच्चों को ढूंढने निकलती है तो उसे एक
पेड़ के नीचे उनके टूटे पंख दिखते हैं. उस पेड़ पर गिद्ध का घर था. कबूतर को समझ आ जाता है कि
उसके बच्चों को गिद्ध ने ही मारा है. वो उदास हो कर वापस अपने घोंसले की तरफ आ रही होती है कि रास्ते में उसे खरगोश माँ मिलती है. वो पूछती है “कबूतर बहन आप
क्यों उदास हो?” कबूतर रोते हुए पूरी घटना बताती है. ये सुन कर खरगोश माँ कहती है “गिद्ध का
अत्याचार बढ़ता जा रहा है, इसका कुछ हल ढूँढना पड़ेगा.” तभी उसे एक आइडिया सूझता है.
वो कबूतर से कहती है “चलो बहना मेरे एक दोस्त के पास वो हमारी मदद करेगा.”
वो दोनों चूहों के राजा के
पास पहुँचते हैं और उसे गिद्ध की करतूतों के बारे में बता कर मदद मांगते हैं. राजा
कहता है “मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ.” खरगोश माँ कहती है “गिद्ध जिस पेड़ पर
रहता है आपके लोग उसके जड़ को रात में चुपचाप खोद दे. रात में गिद्ध सोता है, उसे
पता नहीं चलेगा और जैसे ही पेड़ गिरेगा वो भी नीचे गिर जायेगा और लोमड़ी उसे खा
जायेगा.”
रात होते ही सारे चूहे जड़ खोदने में लग जाते हैं और थोड़ी देर में पेड़ के जड़ों
को कुतर देते हैं. नींद में होने के कारण गिद्ध को पता ही नहीं चलता और पेड़ के साथ
वो भी गिर जाता है. तब उसकी नींद खुलती है. सामने लोमड़ी को देख कर वो डर कर उड़ना
भूल जाता है. तभी खरगोश माँ कहती है “किसी कमजोर जानवर को बिना मतलब परेशान करना
और सताना गलत है. अब ये लोमड़ी तुम्हें खा जायेगी.”
गिद्ध ने हाथ जोड़ कर खरगोश माँ और
कबूतर माँ से कहा “मुझे माफ कर दो, अब आगे से किसी भी जानवर को तंग नहीं करूगां और सब
के साथ मेलजोल के साथ रहूँगा, लेकिन मुझे इस लोमड़ी से बचाओ.” खरगोश माँ कहती है “हम
तो तुम्हें केवल सबक सीखाना चाहते थे. लोमड़ी तो तुम्हें केवल डरा रही थी.” इसके
बाद गिद्ध ने जंगल के सभी जानवरों, पक्षियों से माफ़ी मांगी और सबकी दोस्ती हो गयी.

Bahut badiya kahani-meri shivi ko bahut pasand aayi-vushnu
ReplyDeleteमेरी नयी दोस्त shivi को शुक्रिया
ReplyDeleteवाह। अच्छी सीख।
ReplyDeletethanku nitu
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