Saturday, May 2, 2020

बाल कहानी - बेबी हिरण की खुशी


उपासना बेहार
Image Courtesy - Google.com

हिरण का एक छोटा बच्चा था, वो अपनी माँ के साथ पेंच के जंगल में रहता था. एक दिन वो हिरणों के झुण्ड के साथ जंगल में घूमने निकला, उसे खूब मजा आ रहा था, वो जोर से इधर से उधर भागता फिरता और बड़ी छलांग लगाने की कोशिश करता. खेलते खेलते कब वो झुण्ड से अलग हो गया पता ही नही चला. जब ध्यान आया तो अपने को अकेला पा कर वो परेशांन हो गया और घबरा कर इधर उधर भागने लगा और फिसल गया, उसके पैर में चोट लग गयी.शाम होने लगी थी,वो भटक कर अपने इलाके से बहुत दूर आ गया था. 

बच्चे को दूर में एक रोशनी दिखाई दी, वो लंगड़ाता हुआ उस ओर चल पड़ा. वहाँ एक मकान था, जैसे ही वो घर के पास गया, उसे देख कर जंजीर से बंधा कुत्ता रेक्सो जोर जोर से भूकनें लगा, हिरण का बच्चा डर गया लेकिन पैर के चोट के कारण उसे चलते नही बन रहा था, वो वही निढाल हो कर बैठ गया. रेक्सो के भौकने की आवाज सुन कर घर से एक बच्चा बाहर आया. उसने कुत्ते के भौकने की दिशा में देखा तो वहाँ कोई जानवर बैठा दिखा. अँधेरा होने के कारण वह जानवर को पहचान नही सका. 

बच्चे ने पापा को आवाज लगायी और उसने पापा को दूर में बैठे जानवर को दिखाया. पापा हाथ में टार्च और डंडा लेकर धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगे. टार्च की रोशनी जैसे ही हिरण के बच्चे पर पड़ी वो डर कर ओर सिकुड़ गया. “अरे अंकुर बेटा ये तो हिरण का छोटा सा बच्चा है. देखो इसके पैर में चोट लगी है.” अंकुर पापा के पास आया तो देखा एक प्यारा सा डरा-सहमा सा हिरण का बच्चा बैठा है. “तुम ये टार्च पकड़ो, मैं इस बच्चे को पकड़ता हूँ.” पापा ने बच्चे को गोद में उठाया और घर ले आये. उन्होंने अंकुर की मदद से उसके चोट को साफ किया और उस पर पट्टी बांध दी. 

अंकुर के पापा वन अधिकारी थे इस लिए उन्हें इस तरह के काम की जानकारी थी. “लगता है ये बच्चा अपने झुण्ड से बिछुड़ गया होगा”, “अब क्या करें पापा?” “बेटा आज तो यह हमारे साथ ही रहेगा, कल सुबह ही जंगल चल कर इसके झुण्ड को ढूंढेगें और इसे उनके पास छोड़ देगें.” “पापा क्या ये हिरण का बेबी हम नहीं रख सकते क्या”? “बेटा जब तुम शाम में खेल के देर से आते हो तो मैं और तुम्हारी मम्मी कितने परेशांन हो जाते हैं ऐसे ही इसकी माँ भी परेशान हो रही होगी और बेबी को भी देखो, अपने परिवार के बिना कितना डरा हुआ है”. अंकुर को बात समझ में आ जाती है और वह पापा से कहता है “क्या मैं कल बेबी को जंगल में छोड़ने में आपकी मदद कर सकता हूँ?” “हाँ क्यों नहीं,कल हम दोनों इसे छोड़ने जायेगें.”

दूसरे दिन अंकुर और उसके पापा सुबह जल्दी उठ जाते हैं और पापा नन्हें हिरण को एक बड़े से डलिया में डालते हैं. ये देख अंकुर पूछता है “पापा बेबी को डलिया में क्यों डाला है ये उसमें परेशांन हो जायेगा”. “बेटा अगर उसे डलिया में नही ले जायेगें तो दूसरे जानवर हमें और इसे नुकसान पहुँचा सकते हैं”. अंकुर और उसके पापा डलिया लेकर जंगल की ओर चल पड़े. दोनों धीरे धीरे जंगल में अन्दर बढ़ते चले जाते हैं. पापा ध्यान से जमीन को देख कर हिरण के पैरों के निशान को ढ़ूंढ़ने की कोशिश करते हैं. थोड़ी दूर चलने पर उन्हें पैरों के निशान दिखाई पड़ते हैं. “देखो अंकुर ये पैरों के चिन्ह देख रहे हो, ये हिरणों के है, हमें बिना आवाज किये ध्यान से आस पास देखते हुए आगे बढ़ना होगा”. 

थोड़ी दूर जाने पर उन्हें हिरणों के झुण्ड घास चरते हुए दिख जाते हैं. पापा पेड़ के ओट में आ कर डलिया से हिरण के बच्चे को निकालते हैं और झुण्ड की दिशा की ओर छोड़ देते हैं. बच्चा अपने परिवार को देख जोर जोर से आवाज लगाने लगता है और बहुत खुश हो कर तेजी से माँ की तरफ दौड़ पड़ता है. माँ भी उसके तरफ दौड़ती है और प्यार से उसे चाटने लग जाती है. माँ और बच्चा प्यार से अंकुर और उसके पापा को देखते हैं.

अंकुर और पापा भी उन्हें साथ देख कर बहुत खुश होते हैं और निश्चिंत हो कर घर की ओर चल पड़ते हैं.


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