उपासना
बेहार
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| Image Courtesy - Google.com |
शहर के चौराहे पर एक ट्रैफिक सिग्नल था और उसके बाजू में एक
बिजली का खंभा था. पहले इस चौराहे पर केवल ट्रैफिक सिग्नल का एकछत्र राज था, लेकिन
कुछ दिनों पहले यहाँ एक बिजली का खंभा लगाया गया. ट्रैफिक सिग्नल को ये बात बुरी
लगी कि अब ये जगह इस बिजली के खंभे के साथ शेयर करनी पड़ेगी. खंभे ने आते से ही उससे
दोस्ती करनी की कोशिश की लेकिन ट्रैफिक सिग्नल ने ज्यादा रूचि नही दिखाई.
एक दिन
ट्रैफिक सिग्नल ने घंमड से खंभे को कहा “तुम्हें
नही लगता कि मैं तुमसे ज्यादा महान हूँ और तुमसे ज्यादा उपयोगी भी.” खंभे ने कहा “वो
कैसे?”. “ये मेरे तीनों रंगों को देख रहे हो, इससे मैं गाड़ियों को नियंत्रित करता हूँ. इसी को देख कर सब
अपनी गाड़ी चौराहे से सही तरीके से निकालते हैं. मेरे इन्ही रंगों के सही समय पर
जलने के कारण ही तो कभी चौराहे पर एक्सीडेंट नही होता हैं. अगर मैं अपने तीनों
रंगों हरे, नीले और पीले को गलत
चलाऊॅ या चलाना ही बंद कर दूं तो पूरा ट्रैफिक बिगड़ जायेगा और फिर देखना कि यहाँ
कितनी आपाधापी हो जायेगी और गाड़ियाँ आपस में टकराने लगेगीं”. अहंकारी ट्रैफिक सिग्नल की इस बात को सुन कर बिजली के खंभे
ने कहा “हर वस्तु का अपना महत्व होता है. सभी की अपनी अपनी उपयोगिता होती हैं. कोई
बड़ा या छोटा नही होता हैं.” यह बात ट्रैफिक सिग्नल को बुरी लगी “मैं यह बात नही
मानता हूँ, मैं तुम्हें अभी साबित
कर के दिखाता हूँ कि मैं तुमसे ज्यादा बेहतर हूँ”.
तभी ट्रैफिक सिग्नल ने अपने
तीनों रंगों को बंद कर दिया और गलत समय पर गलत रंगों का सिग्नल देने लगा. इससे
वाहन चालक परेशान हो गये, चौराहे पर जाम लग गया. गाड़ियों की लम्बी लाइन लग गई. तुरंत
ट्रैफिक सिग्नल सुधारने वाले को बुलाया गया, उन्होनें ट्रैफिक सिग्नल को ठीक किया. उसके बाद फिर से गाड़ियाँ
आराम से निकलने लगीं. ट्रैफिक सिग्नल ने बड़े गर्व से खंभे की ओर देखा और कहा “अब
मानते हो ना कि मैं तुमसे ज्यादा महत्वपूर्ण हूँ”, बिजली के खंभा मुस्कुराया और
अपनी बात फिर से दोहरायी “सबका अपना महत्व होता है, सब अपनी उपयोगिता में बड़े होते
हैं और यह बात तुम्हें अभी समझ में नही आएगी, तुम इस बात को समय आने पर समझ जाओगे”.
ट्रैफिक सिग्नल को गुस्सा आ गया और उसने खंभे से बात करना बंद कर दिया. बिजली के
खंभे ने मन ही मन सोचा “यह ऐसे नही मानने वाला, इसे यह बात साबित करके दिखानी होगी”.
एक दिन रात में अचानक चौराहे की लाइट बंद हो गई जिससे फिर
गाड़ियों को परेशानी होने लगी. उन्हें रास्ता और आसपास दिखायी देना बंद हो गया.
जिससे चौराहे में गाड़ियों की अफरातफरी मच गई. पैदल चलने वाले लोगों को रास्ता
दिखना बंद हो गया. उन्हें चलने में दिक्कत आने लगी. पैदल चलने वालों को बचाने के
चक्कर में गाड़ी वाले भी बहुत धीरे धीरे अपनी गाड़ी चलाने लगे. इससे चौराहे के
चारो तरफ दूर दूर तक गाड़ियों की लाइन लग गई. तब तुरंत बिजली के खंभे को ठीक करने
वाले को बुलाया गया. उसने बिना समय गवाऐं लाइट को ठीक किया. लाइट के ठीक होते ही चौराहा
जगमगाने लगा. पैदल चलने वालों ने राहत की सांस ली. पहले की तरह ट्रैफिक फिर से
शुरु हुआ और थोड़ी देर में सामान्य हो गया. ट्रैफिक सिग्नल को यह देख कर हैरानी हुई
कि लाइट के चले जाने पर लोगों को तो ओर ज्यादा परेशानी हुई.
तब ट्रैफिक सिग्नल ने बिजली
के खंभे से कहा “मुझे माफ कर दो, तुम सही कहते थे, असल में मुझे घमंड़ हो गया था. तुम्हारी बात मेरी समझ में आ
गई कि इस दुनिया में हर वस्तु का अपना महत्व एवं उपयोगिता है और कोई वस्तु किसी ओर
का स्थान नही ले सकती है”. उस दिन के बाद से ट्रैफिक सिग्नल और बिजली के खंभे दोनों
अच्छे दोस्त बन गये. ट्रैफिक सिग्नल अब हरेक चीज का सम्मान करने लगा.

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