उपासना बेहार
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| Image Courtesy -Google.com |
गर्मी के दिन थे, लोमड़ी खाने की तलाश में निकली हुई थी रास्ते में उसे मोटा कन्नू मुर्गा दाना खाते दिख गया, लोमड़ी तुरंत बरगद के पेड़ के पीछे छिप गयी. मुर्गा आसपास से अंजान खाने में व्यस्त था तभी पेड़ के पीछे छिपी लोमड़ी अचानक से मुर्गे के एक दम सामने आ जाती है, मुर्गा कुछ समझ पाता उससे पहले ही लोमड़ी झपटा मार कर उसे पकड़ लेती है. मुर्गा उसके चुंगल से निकलने की बहुत कोशिश करता है लेकिन असफल रहता है. लोमड़ी कन्नू मुर्गे को पकड़ कर बोरी में डाल देती है और बोरी के मुंह को रस्सी से बांध देती है. लोमड़ी सोचती है ‘इसे माद में ले जा कर आराम से खाउगी.’
वो बोरी को पीठ में लाद कर अपने मांद की और चल पड़ती है. कन्नू मुर्गे को समझ नहीं आता है कि वह अपनी जान कैसे बचाये. तभी उसे याद आता है कि आज तो उसके दोस्त उससे मिलने आने वाले थे. जब वो सब मुझे अपने घर में नहीं देखेगें तो ढूंढेगें जरुर. अब केवल वो ही मेरी जान बचा सकते हैं. मुझे कुछ ऐसा करना होगा जिससे वो जान जाये कि मेरी जान खतरे में है.’ जिस बोरी में कन्नू मुर्गा बंद रहता है उसमें एक छोटा सा छेद था. कन्नू अपने एक एक पंख तोड़ तोड़ कर उस छेद से गिराने लगता है.
मांद की ओर चलते चलते लोमड़ी को रास्ते में एक नदी दिखाई देती है. गर्मी के कारण उसके कपड़े पसीने से भीग गए थे. पानी देख कर लोमड़ी का मन नहाने को करने लगता है. वह बोरी को एक पेड़ के तने से टिका देती है और नहाने चली जाती है.
उधर कन्नू मुर्गा के दोस्त टामी कुत्ता और पप्पू बंदर उससे मिलने आते है, लेकिन उसे घर में ना पा कर चिंतित हो जाते है. पप्पू बंदर कहता है “ टामी मुझे लगता है कन्नू मुर्गा के साथ कुछ अनहोनी हुयी है. चलो उसे आसपास ढूंढतें हैं.” जब दोनों दोस्त कन्नू मुर्गा को आसपास ढूंढने लगते हैं. तभी टामी की नजर रास्ते में गिरे सफ़ेद पंखों पर पड़ती है “पप्पू देखो ये पंख तो हमारे दोस्त कन्नू मुर्गा के लग रहे हैं.” पप्पू बंदर उस पंख को अपने हाथ में लेकर गौर से देखता है “यार टामी तुम सही कह रहे हो, ये तो हमारे दोस्त के ही पंख है.”
पप्पू बंदर और टामी कुत्ता थोडा आगे बढ़ते हैं तो फिर एक पंख मिलता है अब दोनों दोस्त पंखों के सहारे आगे बढ़ते जाते हैं. उन्हें कुछ दूरी पर एक नदी दिखाई देती है, जिसमें एक लोमड़ी नहा रही होती थी और पेड़ से टिकी हुई एक बोरी रखी थी जो हिल रही थी.
पप्पू और टामी बिना आवाज किये चुपचाप उस बोरी के पास जाते हैं और धीरे से आवाज लगाते हैं “कन्नू दोस्त क्या बोरी के अंदर तुम ही हो.” कन्नू मुर्गा अपने दोस्तों की आवाज सुन कर खुश हो जाता है और कहता है “दोस्तों इस लोमड़ी ने मुझे बोरे में बंद कर दिया है और मांद में ले जा कर खायेगा. मेरी जान बचा लो.” पप्पू बंदर कहता है “तुम चिंता मत करो दोस्त, हम तुम्हें अभी बाहर निकालते हैं.” पप्पू बंदर जल्दी से बोरी में बंधी रस्सी खोल देता है. कन्नू मुर्गा बाहर आ जाता है. अपने दोस्तों से गले मिलता है और अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद देता है.
पप्पू बंदर कहता है “चलो इस लोमड़ी को सबक सिखातें हैं.” टामी और कन्नू दोनों पूछते हैं “कैसे.” पप्पू बंदर उन दोनों को अपनी योजना बताता है और बोरी के अंदर टामी कुत्ते को बंद कर देता है. पप्पू बंदर कन्नू मुर्गे के साथ पेड़ में चढ़ कर छुप जाते हैं. थोड़ी देर में लोमड़ी नहा कर आ जाती है और बोरी को कंधे में उठा कर निकल पड़ती है. उसे बोरी बहुत भारी लगती है लेकिन वो इसका कारण समझ नहीं पाती है. मांद में पहुँच कर वह कन्नू मुर्गे को खाने के लिए जैसे ही बोरी का मुँह खोलती है, उसमें से टामी कुत्ता जोर से गुर्राने हुए बाहर आता है. टामी कुत्ते को देख कर लोमड़ी की घिघी बंध जाती है. उसकी समझ में नहीं आता है कि ये चमत्कार कैसे हो गया, उसने बोरी में तो मुर्गे को बंद किया था लेकिन वो कुत्ता कैसे बन गया. डर के मारे लोमड़ी दुम दबा कर भाग जाती है. तीनों दोस्त आपस में गले मिलते हैं और घर चल पड़ते हैं.

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