उपासना बेहार
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एक लड़का था समर ,जो अपनी दादी के
साथ रहता था। एक दुर्घटना में उसके माता और पिता की मृत्यु हो गई थी। तब से उसका
व्यवहार बहुत बदल गया था। हमेशा उटपटांग हरकतें करता रहता था। पड़ोस के लोग उससे
परेशान थे। वह हर किसी के साथ बद्तमीजी से बात करता था। लोग उसे अच्छी सलाह देते
तो उन्हें भी वह बुरा भला कहता।
समर के पड़ोस में ही हमउम्र एक लड़का नील रहता था। समर
और नील दोनो एक ही स्कूल में पढ़ते थे। नील सबकी मदद करता था। इसलिए स्कूल और
पड़ोस के सब लोग उसे पसंद करते थे लेकिन समर नील से चिढ़ता था। जबकि नील उससे
दोस्ती करना चाहता था। नील की मम्मी ने बताया था कि समर के मम्मी-पापा की मृत्यु हो गई है इस कारण वह दुख
में इस तरह की हरकतें करता रहता है और अपनी तरफ सब का ध्यान खीचना चाहता है। इसलिए
उसकी हरकतों का बुरा नही मानना चाहिए और उससे प्रेम से व्यवहार करना चाहिए।
एक दिन समर उल्टी
शर्ट पहन कर घर से निकला, नील ने समर को उल्टी शर्ट पहने देखा तो कहा ‘तुमने उल्टी शर्ट
पहनी है।’ समर ने नील की
तरफ देखा और बहुत रुखे स्वर में कहा ‘तुम्हें क्या?’ और वह आगे बढ़
गया। रास्ते में जिस किसी ने भी उसे उल्टी शर्ट को लेकर कहा उसने सभी को गुस्से
में कहा ‘तुम्हें क्या?’
कुछ दिनों बाद
उसने फिर एक अजीब हरकत की। पुराने पेपर लिये और उसके बारीक बारीक कतरने करने लगा। उसके
घर के सामने से जो भी निकलता उसे टोकते हुए कहता ‘अरे समर ये क्या
कर रहे हो पेपर क्यों फाड़ रहे हो और गंदगी फैला रहे हो।‘ तो समर उन्हें
कहता ‘तुम्हें क्या, ये मेरे घर का
पेपर है मैं इसके साथ कुछ भी करूँ तुमसे मतलब।’
इन्ही हरकतों के
कारण मोहल्ले के बच्चे उसके साथ खेलना नही चाहते थे। जब समर इस मोहल्ले में रहने
आया था तो सब बच्चे उससे दोस्ती करना चाहते थे लेकिन समर ने ही उनसे दोस्ती करने
में रुचि नही दिखायी। बच्चों ने एक दो बार कोशिश की परन्तु समर उनके साथ खेलने नही
आया। वो अकेले ही अपने खिलौनों से खेलता रहता था। स्कूल से आने के बाद वह हमेशा घर
में ही रहता था। स्कूल में भी किसी से सही तरीके से बात नही करता था और सबको परेशान
करता रहता था।
एक दिन समर अपनी
साइकिल लेकर निकला,
साइकिल को आगे ले जाने के बदले वो उसे उल्टी पाईडिल मार कर
पीछे की ओर चलाने लगा। बच्चों ने उसे देखा और मन ही मन सोचा कि आज तो ये जरुर
गिरेगा पर किसी ने उसे टोका नही क्योंकि उन्हें पता था कि कोई कुछ भी बोलेगा तो समर
उसे बुरा भला ही कहेगा। लेकिन नील से रहा नही गया उसने कहा ‘समर इस तरह
साइकिल उल्टी चलाओगे तो गिर जाओगे और तुम्हें चोट आ जायेगी।’ समर का वही रुखा
जवाब आया ‘तुम्हें क्या? मुझे मत सीखाओं
कि मैं कैसे साइकिल चलाऊॅ। ये मेरी साइकिल है, मेरा जैसा मन
करेगा मैं वैसी ही गाड़ी चलाऊगां।’ नील ये सुन कर चुपचाप अपने घर की चल दिया.
अभी वो थोड़ी दूर ही पहुंचा था कि तभी उसे जोर से साइकिल के टकराने की आवाज सुनाई दी। वो समझ गया कि हो न हो समर
गिरा होगा। वो आवाज की तरफ भागा। उसका सोचना सही था। समर गिरा हुआ था और पास में एक
बाइक भी गिरी हुई थी। हुआ यूँ कि समर उल्टी साइकिल चलाते चलाते साइड में खड़ी बाइक
से टकरा गया जिससे वह साइकिल से गिरा और इस टक्कर में बाइक भी गिर गई। इस आवाज को
सुन कर बाईक का मालिक बाहर आ गया और समर को जोर जोर से डांटने लगा। नील दौड़ कर वहां
पंहुचा और बाइक के मालिक से समर की इस हरकत के लिए माफी मांगीं और उसे अपने घर ले
जा कर उसके चोटों पर पट्टी की और घर छोड़ कर आया।
इस घटना ने समर को
बदल दिया। रात में वह सभी लोगों के साथ किये गये अपने व्यवहार के बारे में सोचने
लगा। वह अपने मम्मी और पापा की मौत से बहुत अकेला हो गया था। वह चाहता था कि सब
उसकी ओर ध्यान दें और उसे प्यार करें। इसलिए वह उटपटांग हरकत करता था लेकिन इससे
लोग पास आने के बजाये उससे दूर होते चले गये। उसके हमउम्र बच्चे उसे अपना दोस्त
बनाना चाहते थे परन्तु उसी ने कभी भी उनसे दोस्ती करना नही चाहा उल्टे सभी से बुरा
भला कहता रहा।
समर को अपने व्यवहार पर शर्म आयी। अब वो सभी के साथ अच्छे और प्रेम
से व्यवहार करेगा और उटपटांग हरकत करना छोड़ देगा। सुबह होते ही वो आसपड़ोस और
स्कूल में अपने व्यवहार के लिए माफी मांग लेगा। अब उसके भी बहुत सारे दोस्त होगें
और सब उसे भी प्यार करेगें। एक नई सुबह और शुरुवात के बारे में सोचते सोचते समर
गहरी नींद में सो गया।

Prerak Prasang ..thanks for sharing Upasana
ReplyDeleteशुक्रिया मनोज भाई
ReplyDeleteबहुत शिक्षाप्रद कहानी
ReplyDeletethanku
DeleteA nice story for children. Can teach them empathy
ReplyDeleteshukriya advaita
ReplyDeleteपहले समस्या का संपूर्ण चित्रण फिर उचित समाधान। सही सटीक शिक्षाप्रद बाल कहानी।
ReplyDeleteशुक्रिया प्रकाश जी
ReplyDeleteमेरा नाम शिवि है और कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी
ReplyDeleteshukriya shivi
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