Tuesday, April 28, 2020

बाल कहानी - सोने का कड़ा


उपासना बेहार
Image Courtesy -Google.com


कान्हा के जंगल में एक शेर रहता था। वह कई दिनों से भूखा था और भोजन की तलाश में अपना जंगल छोड़ पास के जंगल में इस आस से भटक रहा था कि कोई मरा हुआ जानवर मिल जाये तो उसे खा कर अपनी भूख मिटाये लेकिन अभी तक खाने को कुछ नही मिल पाया था। उसे जोर की भूख के साथ प्यास भी लग रही थी. वह नदी की ओर चल पड़ा. शेर पानी पी कर वही एक पेड़ से टिक कर बैठा था। तभी उसे नदी के पास कुछ पीली चमकती चीज दिखायी दी। वह उठ कर धीरे धीर उसकी तरफ बढ़ा। पास जाने पर देखा कि वह चमकती चीज सोने का मोटा कड़ा था।

शेर ने कड़ा देख कर सोचा ये मेरे किस काम का और वापस जाने लगा तभी उसे एक आइडि़या आया “क्यों ना इसे नदी के किनारे ऐसी जगह पर रख दूँ जहाँ से यह राहगीरों को आसानी से दिखें और वो लालच में आकर उसे लेने नदी के किनारे आयें और मैं उन पर पीछे से आक्रमण कर मार डालूँगा। इस तरह मुझे आसानी से शिकार मिल जायेगा। 

उसने अपने आइडिया पर अमल करते हुये सोने के कड़े को ऐसी जगह पर रख दिया जहाँ से लोग उसे देख सकें और खुद पेड़ के पीछे छिप गया। थोड़ी देर में एक राहगीर उधर ने निकला, जब वह पानी पीने के लिए आया तो दूर से ही उसे सोने का कड़ा दिखाई दिया। उसने चारो तरफ निगाह दौडाई, जब आसपास कोई नही दिखा तो वह कड़े को लेने के लिए आगे बढ़ा लेकिन जैसे ही कड़े के पास शेर पेड़ के ओट में से निकला और उस व्यक्ति को मार कर खा गया। इस तरह उसके भोजन का जुगाड़ होने लगा।

इधर गावं के लोग परेशान हो गये कि जो भी व्यक्ति जंगल के रास्ते दूसरे गावं जाता है वह बीच में ही गायब हो जा रहा है। पहले तो ऐसा नहीं होता था, उनके पास दूसरे गावं या शहर जाने के लिए यही एकमात्र रास्ता था। लोगों के इस तरह से गायब होने का कारण किसी की समझ में नही आ रहा था, लोग सोच भी नही सकते थे कि जंगल में शेर है क्योंकि किसी भी गावं वाले ने कभी जंगल से शेर के दहाड़ने की आवाज नही सुनी थी। गावं वाले अपनी समस्या लेकर मुखिया के पास गये और लोगों के गायब होने की जानकारी दी। मुखिया ने अपने बेटे रघु को इस राज का पता लगाने को कहा।

रघु उसी समय जंगल की ओर निकल पड़ा। वह जंगल में छानबीन करने लगा, लेकिन वहाँ उसे कही भी किसी शिकारी जानवर के पैरों के निशान नही दिखाई दिये। दिन भर जंगल के खाक छानते हुए थक गया था, उसे प्यास लगने लगी थी, वह नदी की ओर चलने लगा। जब वह नदी के किनारे पहुँचा तो उसे भी सोने का कड़ा दिखायी दिया। वह सोचने लगा कि आखिर यह कड़ा यहाँ कैसे आया, उसने आसपास नजर घूमायी, उसे कोई नही दिखायी दिया जिससे उसे शंका हुई, उसने दूर से ही सोने के कड़े के आसपास को ध्यान से देखा तो वहाँ शेर के पैरों के निशान दिखाई दिया। वह चौकन्ना हो गया, रघू को अब सारा माजरा समझ में आ गया। वह तुरंत नदी के किनारे से हट गया और थोड़ी दूर पर जा कर बैठ गया। वह सोचने लगा कि कोई ऐसी तरकीब ढुढी जाये जिससे शेर भी पकड़ा जाये और सोने का कड़ा भी मिल जाये।

रघु गावं से जाल और एक मरा हुआ बकरी खरीद कर ले आया. बकरी को नदी के पास एक पेड़ के नीचे रख दिया और पेड़ के ऊपर जाल लटका दिया, उसका एक छोर पकड़ कर वह पेड़ पर चढ़ कर पत्तों के पीछे छिप गया।

पास में छिपे शेर को बकरी की खुश्बू आने लगी, शेर ने आस पास देखा तो उसे पेड़ के नीचे केवल मरी बकरी दिखाई दी, तुरंत शेर उस मरे हुए बकरी के पास पंहुचा, रघु ने तुरंत जाल का रस्सा खिच दिया। जाल सीधे शेर के ऊपर जा कर गिरा और शेर जाल में फंस गया। रघु ने जाल को अच्छी तरह से बांध दिया और नदी किनारे जा कर सोने के कड़े ले आया और जल्दी जल्दी गावं गया और लोगों को पूरी बात बतायी। फिर सभी वन अधिकारी के पास गये और उन्हें भी पूरा किस्सा सुनाया. वन अधिकारी अपने कर्मचारियों को लेकर सबके साथ जंगल की तरफ चल पड़ा वहा जाल में फंस शेर मिला.वन अधिकारी शेर को लेकर चले गये।
गावं वालों ने रघू के सूझबूझ की तारीफ की।


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