Wednesday, June 10, 2020

बाल कहानी - मटर के दाने


उपासना बेहार
Image Courtesy -Google.com

कान्हा का जंगल बहुत बड़ा है जिसके एक छोर पर कुहू कोयल का घर था तो दूसरे छोर पर उसके दोस्तों का. कई दिनों से वो अपने दोस्तों से मिलने जाने का सोच रही थी. आज वो अपने दोस्तों गप्पू हिरण और मटरू घोंघा से मिलने उनके घर जा रही थी. रास्ते में वो अपनी सुरीली आवाज में गीत गुनगुनाते हुए गुजर रही थी तभी उसे जमीन में कुछ मटर के दाने दिखते हैं. दाने देख उसे भूख लग आती है, वो ज्यादातर दाने तो खा जाती है और 2 दानों को संभाल कर अपने झोले में रख लेती है और फिर गुनगुनाते हुए चल पड़ती है. 

जब वो अपने दोस्त गप्पू हिरण के घर पहुँचती है तो गप्पू हिरण उससे पूछता है “कुहू तुम इतनी खुश क्यों हो.” कुहू कोयल कहती है मुझे रास्ते में मटर के दाने मिले, कुछ तो मैंने खा लिए अब ये 2 दाने बचे हैं चलो इन्हें तुम्हारे घर लगा देते हैं.” ये बात सुन कर गप्पू हिरण जोर से हंस पड़ता है और कहता है केवल दो बीज उगा के मैं क्या करूगां, तुम अगर ये सोचती हो कि इससे बहुत सारे मटर हो जायेगें तो तुम गलत हो. दो बीज से कुछ नहीं होने वाला. क्यों ना तुम इसे भी खा लो.” कुहू चिड़िया कुछ नहीं बोलती और मटर के दानों को रख लेती है. 

फिर वो अपने दूसरे दोस्त मटरू घोंघा के घर जाती है. वहाँ भी वह मटरू घोंघा को मटर के दाने को उगाने को कहती है लेकिन मटरू घोंघा कहता है “कुहू दो बीज से कुछ नहीं उगने वाला, मैं इसे नहीं उगाऊँगा, तुम इसे अपने घर ले जाओ.” कुहू चिड़िया मटर के उन 2 बीज को अपने घर ले आती है और अपने नुकीले चोंच से जमीन में दो गढ्ढे खोद कर उन्हें बो देती है. 

उसके घर के कुछ दूरी पर एक पानी की टंकी थी वही से पानी ला कर बीजों में डालती थी. उसे पानी लाने बार बार जाना पड़ता था, कई बार वो थक जाती थी लेकिन थोड़ा सुस्ता के फिर पानी लेने चली जाती थी. सब लोग कुहू कोयल से कहते “तुम इतनी मेहनत क्यों कर रही हो, कुछ नहीं होने वाला.” लेकिन कुहू किसी की बात पर ध्यान नहीं देती और लगन से रोज बीजों में पानी डालती. धीरे धीरे बीज अंकुरित होने लगते हैं, उनमें बहुत सारे मटर के दाने आ जाते हैं. कुहू चिड़िया बहुत खुश हो जाती है.

गप्पू हिरण और मटरू घोंघा ने सोचा बहुत दिन हो गए कुहू कोयल की कोई खबर ही नहीं है,चलो उससे मिलने चलते हैं. दोनों दोस्त कुहू से मिलने उसके घर आते है तो आश्चर्यचकित हो जाते हैं. कुहू के आँगन में मटर के पौधे लगे हैं और उनमें खूब सारे मटर लगे हैं. गप्पू हिरण मटर का एक फल्ली तोड़ कर खाता है. मटर गजब के मीठे थे. मटरू घोंघा ने भी एक मटर खाया, उसने आज तक इतना मीठा मटर नहीं खाया था. 

बगीचे में आवाज सुन कर कुहू घर से बाहर आती है,अपने दोस्तों को देख कर वो बहुत खुश हुई. गप्पू हिरण ने कहा “कुहू हमने आज से पहले इतना मीठा मटर नहीं खाया था. तुम्हारे मेहनत सफल हो गयी.” कुहू कटोरा भर के मटर के दाने तोड़ लाती है और तीनों दोस्त मिल कर खूब मटर खाते हैं. कुहू गप्पू हिरण और मटरू घोंघा को घर ले जाने के लिए भी मटर के दाने देती है. दोनों कुहू कोयल को धन्यवाद देते हैं और घर की तरफ चल पड़ते हैं.


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