उपासना बेहार
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कक्षा 8 में पढ़ने वाला अजय अपने
परिवार के साथ शहर से बाहर बने एक कालोनी में रहता था. एक दिन गाँव से फोन आया कि
उसके दादा जी की तबियत बहुत खराब है और दादा ने अजय के पेरेंट्स को तुरंत गाँव
बुलाया है. अजय के माँ–पापा चिंतित हो गए कि उन्हें अजय को अकेले छोड़ कर जाना
पड़ेगा. वे उसे अपने साथ नहीं ले जा पा रहे थे क्योंकि दो दिन बाद ही उसका एग्जाम
था. पापा-मम्मी को चिंतित देख कर अजय ने कहा “पापा आप लोग परेशांन क्यों हो रहे
हैं, राधे चाचा हैं ना. फिर मैं अकेला कैसे हुआ और वैसे भी आप कहते भी तो हैं कि
मैं बहादूर बच्चा हूँ.” राधे चाचा कई सालों से उनके साथ रह रहे थे,वो घर की देखभाल
करते थे. उसी दिन अजय के पेरेंट्स गावं चले गए.
रात में मंगलू चोर चोरी के
इरादे से उस कालोनी की तरफ आया. उसने देखा कि एक घर में रात 8 बजे ही घुप अँधेरा है. वो घर अजय का था. अजय और
राधे चाचा खाना खा के सो गए थे. चोर ने सोचा “माजरा क्या है. घर के लोगों ने इतनी
जल्दी लाइट बंद क्यों कर दी. कल दिन में आ कर इसका पता लगाऊंगा.”
दूसरे दिन मंगलू चोर एक
अधिकारी का रूप लेकर अजय के घर पहुँचता है. राधे चाचा दरवाजा खोलते हैं, मंगलू चोर
ने कहा “इस घर के मालिक के नाम एक डाक है. उन्हें ही देना हैं.” “साहब लोग तो गाँव गए हैं. कल तक वापस
आयेगें”. ये सुन मंगलू अंदर ही अंदर खुश हो जाता हैं और कहता है “तब मैं कल
आऊंगा.” फिर वो घर के पिछवाड़े में छिपे अपने साथी को बताता है “संगलु हमें आज ही
यहाँ डाका डालना होगा क्योंकि घर के लोग कल वापस आने वाले हैं, अभी चल कर ये खबर
सरदार को बताते हैं”.
इन दोनों चोरों की बात अजय सुन लेता है और घबरा जाता है. तभी
उसे अपनी मम्मी की कही बात याद आती है “जब भी कोई मुश्किल आये तो घबराना नहीं, शांत
हो कर उसका हल ढूँढना.” वो तुरंत राधे चाचा को चोरों की प्लानिंग बताता है. राधे
चाचा उसे कहते है “बेटा तुम डरना नहीं हम इन चोरों को सबक सिखायेंगें.” फिर चाचा पुलिस
अधिकारी को फ़ोन कर पूरी घटना बताते हैं, तब तक अजय थोड़ी दूर में रहने वाले अपने
दोस्त को फ़ोन लगा कर उसके पापा को सारी बात बताता है.
कुछ ही देर में उसके दोस्त
के पापा आस-पड़ोस के लोगों को ले कर आ जाते हैं. पुलिस अंकल भी कई सिपाहियों के साथ पहुँच
जाते हैं. इस चोर गिरोह की पुलिस को भी तलाश थी. सब मिल कर उन चोरों को पकड़ने का
प्लान बनाते हैं.
सबसे पहले पुलिस की गाड़ी को
अजय के कालोनी से दूर खड़ा करते हैं ताकि चोरों को पता ना चले की घर में पहले से
पुलिस है. अजय के पड़ोस के घर के छत पर दूरबीन लेकर 2 सिपाही बैठ जाते हैं. 2
सिपाही घर के पास पेड़ पर छुप जाते हैं. अजय, राधे चाचा, पुलिस अंकल और आसपड़ोस के
लोग घर की सारी लाइट बंद कर घर के अंदर छुप जाते हैं.
थोड़ी देर में छत में छिपे
सिपाही पुलिस अंकल को फोन करके बताते हैं कि 5 से 6 लोग अजय की घर की ओर बढ़ रहे
हैं जरुर ये चोर होंगे. घर में छुपे सभी लोग सावधान हो जाते हैं. कुछ ही देर में
घर के पीछे के तरफ की खिड़की को खोलने की आवाज आती है और एक एक करके सभी चोर घर के
अंदर घुस जाते हैं. तभी घर में छुपे सभी लोग उन चोरों को पकड़ लेते हैं. उनका एक
चोर साथी जो बाहर खड़ा रह कर पहरा दे रहा होता था, उसे भी पेड़ में छिपे सिपाही पकड़
लेते हैं. इस तरह पुलिस और कालोनी वालों की मदद से चोर गिरोह पकड़ा जाता है.
पुलिस
अंकल सभी लोगों को धन्यवाद देते हैं और अजय की साहस और सूझबूझ की तारीफ करते हैं. पुलिस
अंकल इस पूरी घटना के बारे में अजय के पेरेंट्स को जानकारी देते हैं. अजय के मम्मी–पापा
सभी पड़ोसियों को मदद करने के लिए धन्यवाद देते है पर सभी कहते हैं “धन्यवाद का
असली हक़दार तो आपका बेटा है. वो बिलकुल घबराया नहीं और हमें फोन कर बुलाया और
योजना बना कर हम सब ने चोर को पकड़ा.” फिर सभी
लोग अजय के लिए जोरदार ताली बजाते हैं.

So nice ...brave Ajay
ReplyDeleteशुक्रिया मनोज भाई
ReplyDeleteबहुत बढ़िया कहानी
ReplyDeleteआलोक पाराशर, इंदौर
thanku alok
ReplyDeleteWaah, Ajay ki soojhbhoojh to Kamal hai
ReplyDeleteshukriya
ReplyDeleteNice story
ReplyDeleteThanku
DeleteKahani bahut badiya thi aur ye shikha ki akele ghabrana nahi chahiye- Shivi
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