उपासना बेहार
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रोशनी अपने परिवार के
साथ मानपूर गाँव में रहती थी. उसका एक बड़ा भाई सोनू था. रोशनी के पिता पुराने
ख्यालों के थे. वे लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने के पक्ष में नही थे. इन्ही सोच के
कारण वो रोशनी को स्कूल नही भेजना चाहते थे लेकिन उन्होंने सोचा कि “लड़की को
कम से कम इतना तो पढ़ा देते हैं कि वह अपना नाम लिखना जान जाये”. इस तरह रोशनी को
बड़े बेमन से उसके पिता ने स्कूल में दाखिला कराया.
दोनों भाई बहन पढ़ाई
में अच्छे थे. धीरे धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे. जब रोशनी ने 5 कक्षा पास कर ली तो उसके पिता ने उसकी पढ़ाई बंद करवा दी और
कहा कि 'अब से वह घर के कामों को सीखेगी'. रोशनी बहुत रोई, अपने पिता से बहुत
मिन्नतें की “पिता जी मैं आगे पढ़ना चाहती है”. पर रोशनी के पिता नही माने और उन्होनें रोशनी का स्कूल जाना
बंद करवा दिया.
रोशनी सुबह उठते ही घर
के कामों में जुट जाती. वो रोज अपने सोनू भईया का स्कूल बैग ठीक करती, उसे यूनिफार्म देती, नाश्ता कराती और उसे स्कूल जाते देखती. भाई के स्कूल जाने के बाद
वह अकेले में रोती और सोचती ‘काश मैं भी फिर से स्कूल जा पाती’.
रोशनी का स्कूल जाना तो छूट
गया लेकिन उसमें पढ़ने की ललक और लगन कम नही हुई. उसने एक उपाय निकाला. वह घर का
काम करने के बाद दोपहर में अपने भाई की किताबें उठा कर चुपके चुपके पढ़ने लगी, रात में भी सब के सो
जाने के बाद वह चुपके से किताबें पढ़ा करती.
सोनू की परीक्षाऐं हो चुकी
थी. आज रिजल्ट का दिन था. सोनू सुबह से ही बहुत चिंतित था, “भईया इसमें डरने की क्या बात है देखना तुम बहुत अच्छे नंबर
से पास हो जाओगें”. रोशनी ने कहा. सोनू रिजल्ट लेने स्कूल गया, वह सेकेंड डिविजन से
पास हुआ था, सभी बहुत खुश हुए. रोशनी के पिता मौहल्ले में मिठाई बांटने निकल पड़े.
रोशनी गुमसुम सी एक
कोने में बैठ कर मन ही मन पिछले साल के इसी समय को याद करने लगी जब वह स्कूल से
अपना रिजल्ट लेकर आयी थी और उसके कहा था “पिता जी देखो मैं कक्षा में प्रथम आयी हूँ.”
तब उसके पिताजी ने कोई खुशी और उत्साह नही दिखाया था और उसके कुछ दिन बाद ही उन्होनें
हिटलरी एलान कर दिया था कि अब रोशनी आगे पढ़ाई नही करेगी.
कुछ साल यूं ही गुजर
गये. इस साल गर्मी बहुत पड़ रही थी. सोनू भईया के स्कूल की छुटटी थी इस कारण वह
मामा के गावं घूमने गया था.
एक रात जब रोशनी के
पिता सो रहे थे तो उनके पेट में बहुत दर्द हुआ, रोशनी की मां घबरा गई. पिताजी को तत्काल अस्पताल ले जाना
था, रोशनी बिना घबराये तुरंत आटो स्टेन्ड़ से आटो ले आयी. मां
और रोशनी उन्हें अस्पताल ले आई. अस्पताल में डाक्टर ने
पिता की हालत देखी और रोशनी की मां से कहा “बहनजी इनका तत्काल आपरेशन करना पड़ेगा, कुछ पेपर है जिस पर आपरेशन से पहले आपको हस्ताक्षर करने
पड़ेगें”. रोशनी ने कहा “डाक्टर सर मेरी मां को हस्ताक्षर करना नही
आता है वो अंगुठा लगा देगीं”.
मां ने कहा “डाक्टर साहब
हम दोनों को ही पढ़ना नही आता है, आप ही पढ़ कर बता दें
कि इसमें क्या लिखा है और कहाँ अंगुठा लगाना है”. तब रोशनी ने वो पेपर अपनी मां के हाथ से लिया और उसे पढ़ कर
मां को अच्छे से समझाया.
रोशनी के पिता का आपरेशन
सफल रहा. दूसरे दिन जब उन्हें होश आया तब डाक्टर ने उनसे कहा “आप बड़े भाग्यशाली
है कि आपको रोशनी जैसी बेटी मिली. आज अगर आपकी जान बची है तो उसकी वजह आपकी बेटी
है, रोशनी तो बहुत बहादुर
और बुद्धिमान लड़की है. रातदिन एक कर दिया आपकी तीमारदारी में”.
डॉक्टर रोशनी को पिताजी
को देने वाली दवाईयों के नाम और समय समझाने लगे, तभी उसके पिता ने कहा “डॉक्टर साहब इसे ये सब मत समझायें, यह तो ठीक से पढ़ना भी नही जानती है. इसकी समझ में नही
आयेगा और मुझे गलत दवाईया दे देगी”.
“आपको किसने कहा कि इसे पढ़ना नही आता है,यह तो बहुत अच्छे से सब कुछ पढ़ लेती है. इसी ने तो आपके
आपरेशन से संबंधित सारे पेपर पढ़ कर अपनी मां को समझाया है, आपकी सारी दवाई यही
खरीद कर लायी है और आप कहते हैं इसे पढ़ना नही आता है”.
रोशनी के पिता डॉक्टर की
बात सुन कर हैरान रह गये और मन ही मन शर्मिदगी महसूस करने लगे, उन्हें बहुत दुख हुआ कि उन्होनें हमेशा सोनू और रोशनी में
फर्क किया. रोशनी पढ़ने में तेज थी फिर भी उसे पढ़ने जाने नही दिया. ये सब सोच कर
उनकी आखें नम हो गई.
उन्होनें रोशनी से कहा
“मुझे माफ कर दो बेटी। मैं सोचता था लडकियाँ ज्यादा पढ़ कर करेगी क्या, उन्हें तो शादी
कर बच्चे सम्भालना और चूल्हा चोका ही करना है, परन्तु आज तुमने मेरी आंखे
खोल दी. मैं गाव में सभी लोगों को भी इस बात के लिए जागरुक करुगा कि वे भी लड़के
और लड़कियों के साथ भेदभाव ना करें और अपनी लड़कियों को खुब पढ़ायें. मैं ठीक होते
ही सबसे पहले तुम्हे स्कूल में दाखिला कराउंगा”.
पिता की बात सुन कर रोशनी
बहुत खुश हुई और अपने पिता के गले लग गई.

Beautiful story ...inspiring ..thanks Upasana for sharing it
ReplyDeleteशुक्रिया मनोज भाई
ReplyDeleteNice to read this story, gender samanta ke liye upyogi kahani
ReplyDeleteकहानी बहुत बहुत अच्छी लगी बहुत प्यारी मेरा नाम शिवि है पापा ने गाने पढ़कर सुनाई
ReplyDeleteif a boy deserve education then so does a girl
ReplyDeletethis is the message that needs to be spread rapidly around the globe
कहानी अच्छी लगी मेरा नाम शिविर में 7 साल की हूं और मैं फर्स्ट क्लास में पढ़ती हूं और मैं हरदा से हूं
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