उपासना बेहार
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रोहित और अक्षय दो दोस्त थे. वे दोनों एक दूसरे के अड़ोसी
पड़ोसी थे. दोनों एक ही स्कूल और एक ही कक्षा में पढ़ते थे. रोहित और अक्षय पढ़ाई में
अच्छे थे. दोनो मन लगा कर पढ़ाई करते थे. किसी साल कक्षा में रोहित प्रथम आता तो
किसी साल अक्षय लेकिन एक खास बात थी जो इन दोनों को अलग करती थी, रोहित हर किसी की मदद
करता था इसलिए वह कक्षा में अपने सहपाठियों और शिक्षकों के बीच बहुत चहेता था जबकि
अक्षय कभी किसी की मदद नही करता था. किसी भी सहपाठी को पढ़ाई में कोई दिक्कत आती थी
तो वह रोहित से ही जा कर पूछता था. रोहित भी उनके प्रश्नों का हल निकाल कर ही दम लेता
था.
सभी को बहुत आश्चर्य होता था कि कैसे अक्षय जैसा लड़का रोहित का दोस्त है. वो
उसे समझाते थे कि अक्षय बहुत मतलबी है. हम जब उससे कुछ सवाल पूछने जाते हैं तो वह
हमें कुछ नही बताता है, उल्टा बहाने बनाने लगता है कि उसे तो कुछ नही आता है. वह तुमसे भी सब पूछ लेता
है लेकिन खुद कभी नही बताता है. तुम उसकी हमेशा सहायता करते हो, देखना जब तुम्हें
उसकी जरुरत होगी तो वह कभी तुम्हारा साथ नही देगा. रोहित यह बात सुन कर हमेशा
मुस्कुरा देता और कहता ‘हर इंसान का अलग स्वभाव होता है. मैं सबकी मदद करता हूँ. यह
मेरा नेचर है.’ इस तरह दोनों की दोस्ती यू ही बरकरार थी.
उस दिन भी रोज की तरह दोनों अपनी अपनी साइकिल से स्कूल की
ओर चल पड़े. रास्ते में रोहित की साइकिल पंचर हो गई. उसने अक्षय से कहा ‘तुम जा कर कही से साइकिल पंचर वाले को अपनी साइकिल में बैठा
कर ले आओ. तब तक मैं यही साइकिल के पास खड़ा रहता हूँ लेकिन
अक्षय को तो आज स्कूल में होने वाले इंटर स्कूल क्रिकेट का फाइनल मैच देखना था.
उसने तुरंत रोहित से कहा ‘तुम्हें तो पता है कि आज स्कूल में इंटर स्कूल क्रिकेट का
फाइनल मैच होने वाला है. मैं बहुत समय से उसे देखना चाहता था अगर मैं पंचर वाले को
ढूंढने जाऊँगा,उसे लेकर आऊॅगा, फिर वो पंचर ठीक करेगा तब तक बहुत समय हो जायेगा और तब तक
मैच शुरु हो जायेगा. मैं ऐसा करता हूँ कि आगे कोई पंचर वाला होगा तो उसे तुम्हारे
पास भेजता हूँ. यह कह कर
वह रोहित को वही छोड़ कर बिना किसी पंचर वाले को बोले जल्दी जल्दी साइकिल चला कर
स्कूल पहुंचा और खेल के मैदान की ओर भागा. वहाँ मैच देखने में तल्लीन हो गया और
रोहित के बारे में बिलकुल ही भूल गया.
दूसरे दिन रोहित स्कूल जाने के लिए समय पर अक्षय के घर नही पहुँच
नहीं पाया, तो अक्षय ने सोचा ‘जरुर रोहित कल की घटना से नाराज है. अगर वो नाराज भी है तो
रहने दो मेरा क्या बिगड़ने वाला है. मुझे उसकी कोई जरुरत नही है.’ यह सोचते हुए वह स्कूल जाने के लिए निकल गया. थोड़ी देर बाद
रोहित अक्षय के घर आया और उसे आवाज लगाई ‘अक्षय चलो स्कूल चलें.’ तभी आंटी बाहर आयी ‘अरे बेटा अक्षय तो स्कूल चला गया.’ ‘हाँ आंटी आज थोड़ा लेट हो गया. यह कहते हुए वह स्कूल
चला गया लेकिन उसे याद आया कि कितनी बार अक्षय लेट हो जाता था तो वह उसके लिए
रुकता था.
कक्षा में अक्षय दोस्तों के साथ कल हुए क्रिकेट मैच के बारे
में बात कर रहा था. एक लड़के ने रोहित को देखते ही कहा ‘तुम कल मैच देखने क्यों नही आये, बहुत मजा आया.’ रोहित ने साइकिल के
टायर पंचर की बात बतायी और कहा कि ‘साइकिल को धक्का देते हुए बहुत दूर जाना पड़ा तब जा कर पंचर
की दुकान मिल पायी. पंचर ठीक करवाते करवाते मैं लेट हो गया और जब स्कूल पहुंचा तो
गेट बंद हो चुका था. यह कह कर वह अपनी किताब खोल कर पढ़ने लगा परन्तु उसे अंदर ही
अंदर बहुत दुख लग रहा था कि अगर कल अक्षय उसकी मदद करता तो वो भी मैच देख सकता था.
उसका भी बहुत मन था यह मैच देखने का. उसके दिन के बाद से उन दोनों के बीच एक दूरी
आ गई. दोनों अलग अलग स्कूल जाने लगे और आपस में भी कम बात होने लगी.
कुछ दिनों बाद छह माही परीक्षा भी शुरु हो गई, दो पेपर हो चुके थे. आज
गणित का पेपर था. रोहित जल्दी जल्दी तैयार हो कर स्कूल की ओर जा रहा था तभी उसने
देखा कि अक्षय रोड़ में गिरा पड़ा है.उसका घुटना छील गया है और वह जोर जोर से रो रहा है. उसने
अपनी साइकिल रोकी और दौड़ कर उसके पास आया,
‘अरे ये कैसे हुआ’
‘किसी बाइक वाले ने टक्कर मार दी.’
‘तुम्हें तो बहुत चोट लगी है चलो जल्दी तुम्हें अस्पताल ले
चलता हूँ.’
‘लेकिन आज तो हमारी परीक्षा है अगर तुम मुझे लेकर जाओगें तो
तुम्हरा पेपर छूट जायेगा और तुम भी फेल हो जाओगे.’
‘तो क्या हुआ, अभी तुम्हें अस्पताल ले जाना ज्यादा जरुरी है, ऐसी हालत में मैं
तुम्हें छोड़ कर नही जा सकता हूँ, चलो मेरी साइकिल के केरियर पर बैठ जाओ.’
रोहित ने अक्षय को उठाया और अपनी साइकिल में बैठा कर तेजी
से पास के अस्पताल ले गया. वहाँ नर्स उसे डेªसिंग रुम में ले जा कर पट्टी बांधने लगी. रोहित ने तुरंत
अक्षय के मम्मी-पापा को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी. जबतक अक्षय की पट्टी नही
हो गई तबतक वह उसके साथ खड़ा रहा. यह सब देख कर अक्षय को अपने आप पर बहुत शर्म आयी.
आज रोहित ने अपनी परीक्षा मिस कर उसको अस्पताल लेकर आया. उसके आँख में आंसू आ गये. उसने तुरंत
रोहित को गले लगा लिया. तभी अक्षय के मम्मी-पापा आ गये और उन्होंने रोहित को बहुत
प्यार किया.
जब स्कूल में इस घटना के बारे में पता चला तो प्रिंसिपल ने
स्कूल के सभी बच्चों के सामने रोहित की बहुत तारीफ की. उन्होनें रोहित और अक्षय को
विशेष परमिशन देते हुए दूसरे दिन अलग से पेपर देने को कहा. इस घटना के बाद से
अक्षय में बहुत बदलाव आया और वह सभी की सहायता करने लगा.

Wonderful.
ReplyDeleteशुक्रिया
ReplyDeleteबहुत ही प्रेरक कहानी लिखी है उपासना जी, ये कहानी आज शाम को बच्चों को सुनाऊंगा...
ReplyDeleteधन्यवाद राजेश भाई
Deleteप्रेरक कहानी
ReplyDeletethanku
Deleteबहुत प्रेरणादायी कहानी है।
ReplyDeleteशुक्रिया दोस्त
Deletemujhe bhi rohit jaise dost chahiye!!!!!
ReplyDeleteanyways, amazing piece of art! well done