उपासना बेहार
एक बार बहेलिया और उनके साथियों ने जंगल में
चिड़ियों को पकड़ने के लिए एक जगह पर ढेर सारा अनाज फैला दिया था. जंगल के सभी पक्षी
अनाज के लालच में उसे खाने के लिए चल पड़ते हैं तब बुद्धिमान तोता मणि उन्हें जाने
से मना करता है और सभी को समझाता है “दोस्तों जरुर बहेलिये ने वहाँ
जाल बिछाया होगा, तुम लोगों की जान को खतरा हो सकता है”.
इस पर एक पक्षी कहता है “अगर बहेलिये ने
वहाँ जाल बिछाया भी होगा तो वो हमें पकड़ नहीं सकेगा. क्योंकि हमें अपने पूर्वजो की
कहानी और सीख अच्छे से याद है. (पक्षियों के पूर्वजो की कहानी दरअसल कुछ यू थी कि
बहुत सालों पहले एक बहेलिये ने पक्षियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया था, सारी पक्षियाँ उसमें फंस जाती हैं पर सभी एकजुट हो कर जाल को साथ लिए ही
उड़ जाती हैं, दोस्त चूहा जाल को काट देता है और सभी पक्षी
आजाद हो जाते हैं.) इसी तरह हम सभी भी एकजुट हो कर जाल ले उड़ेगें, तुम डरपोक बन कर यही रुके रहो.” ये कह कर सभी चल
दिये.
जब सारे पक्षी अनाज खाने में तल्लीन थे तभी
बहेलिया और उनके साथियों ने उन पर जाल फेंका. पक्षियों ने सोचा ‘कोई बात नहीं शिकारी को जाल फेंकने दो, हम सब साथ
मिल कर जाल ले उड़ेगें. पर बहेलिया भी चालाक था, उसने भी अपने
पूर्वजों की वही कहानी सुन रखी थी जिसे पक्षियों ने सुन रखी थी, इसलिए इस बार वो लोहे की जाल बनवा कर लाया था जो भारी भी थी और मजबूत भी.
जब पक्षियों ने पेट भर अनाज खा लिया तब सब ने
एक साथ जाल ले कर उड़ने की कोशिश की लेकिन जाल तो लोहे का था. सभी पक्षियों ने कई
बार उड़ने की कोशिश की, पूरी ताकत लगा दी लेकिन असफल
रहे. सब थक कर चूर हो गए. बहेलिया और उसके साथी पक्षियों को जाल सहित ही पकड़ कर
शहर में बेचने चल देते हैं. तभी रास्ते में पक्षियों को मोनू बंदर मिलता है. वे
उससे कहतें हैं “मोनू भाई तुम तुरंत इस घटना की जानकारी
हमारे दोस्त मणि तोते को दे दो.”
मोनू बंदर तुरंत इस घटना की जानकारी मणि तोता
को देता है. ये घटना सुन कर वो कुछ देर सोचता रहता है फिर मोनू बंदर से कहता है “भाई तुम गाँव जा कर जल्दी से हरिराम दादा को ले आओ, मैं
शेर राजा के पास जाता हूँ.” मणि तोता तुरंत राजा के पास जाता
है और उनसे पक्षियों को छुड़ाने के लिए मदद मांगता है. शेर राजा और मणि तोता उन्हें
बचाने निकल पड़ते हैं.
बहेलिया बहुत खुश होता है कि आज इतने सारे
पक्षी जाल में फंसे हैं इन्हें बेच कर मालामाल हो जायेगा. वह इन्ही ख्यालों में
गुम रहता है कि अचानक सामने एक बब्बर शेर आ जाता है, शेर राजा जोर से दहाड लगाते हैं जिसे सुन कर बहेलिया और उसके साथी डर जाते
हैं, हाथ-पैर कांपने लगते हैं, उनके
गले से आवाज नहीं निकलती है. घबराहट के कारण जाल उन लोगों के हाथ से नीचे गिर जाता
है. वे सब वही जाल छोड़ कर तेजी से भाग जाते हैं, तभी मोनू
बंदर गावं के लोहार हरिराम दादा को ले आता है. दादा अपने झोले से लोहे काटने के
औजार निकालते हैं और बड़ी मेहनत से जाल को काट देते हैं. सभी पक्षी आजाद हो जाते
हैं और लोहार दादा, शेर राजा, मोनू
बंदर और मणि तोते को बहुत धन्यवाद देते हैं और आगे से इस तरह के लालच में ना पड़ने
का वादा करते हैं.

बहुत मजेदार। बढ़िया
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