Wednesday, April 8, 2020

बाल कहानी - बेबी भालू



उपासना बेहार

Image courtesy-Google.com


भालू माँ और उसका छोटा बच्चा हिमालय की बर्फीली पहाड़ियों के गुफा में रहते थे. बेबी भालू अभी बहुत छोटा था इस कारण माँ उसे कभी गुफा से बाहर नहीं ले जाती थी. माँ ने सोचा था कि ‘जब वो थोड़ा बड़ा हो जायेगा तब उसे खुले आकाश में लेकर जाएगी’. जब बेबी भालू थोड़ा बड़ा हुआ तो माँ उसे गुफा से बाहर ले कर आई. बेबी भालू ने पहली बार बर्फ से ढकी पहाड़ी देखी. ख़ुशी के मारे वो तेजी से इधर उधर भागने लगा. माँ ने कहा “तुम मेरे साथ ही रहो और इधर उधर मत भागो”. बेबी भालू ने कहा “लेकिन माँ अब तो मैं बड़ा हो गया हूँ.” “बेटे अभी तुम इतने बड़े नहीं हुए हो कि दुश्मनों से अपनी रक्षा खुद कर सको.” बच्चा जो भी चीज देखता उसके लिए बड़ी आश्चर्य की बात होती. वो बहुत खुश था क्योंकि अब वो तो रोज यहाँ आया करेगा.

दूसरे दिन बेबी भालू सुबह से ही तैयार हो गया. कल की तरह आज भी उसे नई नई चीजें दिख रही थी, तभी उसे आसमान में बहुत सारी चिड़िया उडती दिखाई दी. बेबी भालू उन्हें देख कर हैरान हो गया. वह पहली बार किसी को आसमान में उड़ते देख रहा था. उसने माँ से पूछा “ये क्या है?” “ ये पक्षी हैं और ये सब एक जगह से दूसरे जगह जा रहे हैं.” “माँ क्या ये सारी दुनिया घूम सकते हैं?” “हाँ”. बेबी भालू ने सोचा ‘अगर वो भी उड़ने लगेगा तो सारी दुनिया घूमेगा. लेकिन माँ उसे जाने नहीं देगी इसलिए वो रोज चुपचाप उड़ना सीखेगा और फिर दुनिया घूमेगा.’

अगले दिन वो गुफा से बाहर निकला और एक पेड़ के पीछे छिप कर अपने दोनों हाथ फैला कर उड़ने की कोशिश करने लगा, लेकिन जोर से गिर गया. उसने अपने आप से कहा “कोई बात नहीं आज पहला दिन है, धीरे धीरे सीख जाऊंगा”. अब वो रोज उड़ने की कोशिश करता और गिर जाता. कई दिनों से माँ देख रही थी कि बेबी भालू पेड़ के पीछे बहुत देर तक रहता है. वो जरुर इस रहस्य का पता लगाएगी. माँ ने उससे कहा “आज तुम पहले चले जाओ. मैं थोड़ी देर में आती हूँ”. जैसे ही बेबी भालू गुफा से निकला माँ भी बाहर आई और चुपके से पेड़ के पास गयी तो देखा कि बेबी भालू अपने दोनों हाथ फैला कर उड़ने की कोशिश कर रहा है. “ये तुम क्या कर रहे हो?” माँ ने पूछा. बेबी भालू ने कहा “माँ मैं पक्षियों की तरह उड़ना सीख रहा हूँ, फिर सारी दुनिया घूमूगां.” 

माँ को उसके भोलेपन पर हंसी आ गयी. माँ ने उसे प्यार से गले लगाया और समझाया “बेटा इस दुनिया में अलग अलग तरह के प्राणी होते हैं और सब के अपने गुण होते हैं. पक्षियों के पंख होते हैं जिससे वो उड़ पाते हैं. लेकिन हम वो नहीं कर सकते.” बेबी भालू ये सुन कर उदास हो गया. तब माँ उसे बर्फीली पहाडियों के सबसे ऊँची जगह पर ले जाती है और उसे अपने गोद में बैठा कर वहाँ से फिसलने लगती है. दोनों बर्फ में तेजी से फिसलते हुए नीचे आने लगते हैं. जब वो नीचे पहुँचतें हैं तो माँ पूछती है “बेटा कैसा लगा?” “बहुत मजा आया माँ” “इस तरह फिसलने का जो मजा तुम ले सकते हो वो पक्षी नहीं ले सकते. बेटा सभी जीव-जंतु एक से नहीं होते हैं, सभी के अपने विशेष गुण होते हैं.” बेबी भालू को बात समझ में आ जाती है. वो फिर से फिसलने के लिए मचलने लगता है. माँ उसे लेकर चोटी की और चल पड़ती है.  





6 comments:

  1. Bahut Sundar ...hope humans can also accept this ...

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    1. शुक्रिया मनोज भाई

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  2. this story reflects the heart touching bound between a mother and its ward
    really inspires me

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  3. उपासना जी बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है ये कहानिया ।

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