उपासना बेहार
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मानपुर गाँव के
पास एक बड़े से पेड़ में चिड़िया और उसका बच्चा रहते थे। वो दोनों रोज सुबह खाने की
खोज में जाते और अनाज के दाने खा कर शाम तक आ जाते। एक दिन चिडि़या की तबीयत ठीक
नही थी। इसलिए उसने अपने बच्चे से कहा ‘बेटा आज मेरी तबीयत अच्छी नही है। तुम्हें खाना
खोजने अकेले ही जाना होगा और जब तुम खाना खा लोगे तो अपने मुंह में कुछ दाना रख कर
मेरे लिए भी ले आना।’
बच्चा खाने की खोज में गाँव की तरफ उड़ चला। उड़ते-उड़ते
उसे नीचे अनाज से लदा खेत दिखायी दिया। जब वो थोड़ा नीचे की ओर आया तो पाया कि एक
आदमी उस खेत की रखवाली कर रहा था। बच्चा चुपचाप खेत के पास के पेड़ में बैठ कर उस
आदमी के जाने का इंतजार करने लगा। बहुत देर हो गई लेकिन वह आदमी खेत से गया नही, शाम
होने लगी। बच्चे को घर भी जाना था। बच्चा मन ही मन सोचता है कि ‘अब ज्यादा देर
रुकना ठीक नही है, मां चिंता कर रही
होगी। आज तो अनाज नही मिला। अब कल आऊंगा, घर लौटते समय रास्ते में थोड़ा बहुत जो
भी अनाज मिलेगा उसे मां के लिए ले जाऊॅगां’। शाम में जब वह घर पहुँच तो मां ने उससे
पूछा ‘बेटा इतनी देर
कैसे हो गई?’ तब बच्चा मां को उस आदमी
के बारे में बताता है। मां कहती है ‘अच्छा हुआ तुम खेत पर नही गये। ये इंसान बहुत
खतरनाक होते हैं। पक्षियों को पिंजरें में कैद कर लेते हैं। तुम जितना खाना लाये
हो उसे ही आज हम मिल बाँट कर खा लेते हैं। तुम उस खेत में कल चले जाना।’
दूसरे दिन बच्चा उस
खेत की ओर चल पड़ता है पर वहां पहुँच कर देखता है कि आज खेत की रखवाली के लिए एक
नही दो आदमी है। एक आदमी कल जहाँ खड़ा था आज भी वहीं खड़े हो कर रखवाली कर रहा था।
जबकि दूसरा आदमी खेत के कोने में हाथ फैलाये खड़ा था। बच्चे को बहुत भूख लग रही थी,
कल से उसने भरपेट खाना नही खाया था। वह सोचने लगा ‘क्या करु, थोड़ी देर रुकूं
या चला जाऊ। अब भूख बर्दाशत नही हो रही है, पता नही ये दोनो कब तक खेत में रहेगें। मुझे
पास के दूसरे खेत में जाना चाहिए।’ पर दूसरे खेत में अनाज अच्छे नही थे फिर भी
बच्चे ने खुद खाया और अपनी मां के लिए भी मुंह में भोजन दबा कर ले गया। बच्चे का
मन उदास था वो अपनी बीमार मां को अच्छे अनाज खिलाना चाहता था जिससे वो जल्दी ठीक
हो जाये लेकिन वह मजबूर हो कर मां के लिए खराब अनाज ले जा रहा था।
मां ने उसका उदास
चेहरा देख कर कहा ‘क्या हुआ तुम
इतने उदास क्यों हो?’
बच्चे ने कहा ‘ मां आज फिर मैं उस खेत में गया था लेकिन वहां
तो एक आदमी के बदले दो आदमी रखवाली कर रहे थे। दोनों आदमी अपनी जगह से पूरे दिन बिना
हिले डुले खेत की रखवाली करते रहे। थोड़ी देर के लिए भी कही नही गये और ना ही दोनों
ने एक दूसरे से बात की। मां अब हमें दूसरे गाँव जाना चाहिए। यहाँ अच्छा अनाज मिलना
मुश्किल है।’ मां ने कहा ‘अब मेरी तबीयत
ठीक हो गई है, कल मुझे उस खेत
में ले चलना, मैं देखूगीं कि
माजरा क्या है। फिर सोचेगें कि इस गाँव को छोड़े या नही।’
अगले दिन बच्चा
मां को उस लहलहाते खेत की ओर ले चला। वहाँ जाकर मां ने देखा कि वाकई में दो आदमी
हाथ फैलाये खेत की रखवाली कर रहे हैं। बच्चे ने मां से कहा ‘देखो मां ये ही
दोनो आदमी है जो दिन रात अपने खेत की रखवाली में लगे हुए हैं।’ मां बच्चे से
कहती है ‘हम थोड़ी देर
रुकते हैं और देखते हैं कि ये क्या कर रहे हैं।’ जब बहुत देर हो
गया और उन दोनों में से कोई भी अपनी जगह से नही हिला तब मां को शंका हुई कि ये दोनों
रखवाली करने वाले सुबह से शाम तक एकदम स्थिर खड़े हैं और आपस में भी बिलकुल बात
नही कर रहे हैं फिर मां ने थोड़ा पास जा कर पता लगाने की कोशिश की। जब वो खेत में
छुपते छुपाते उन आदमियों के पास पहुँची तो उन्हें देख कर जोर जोर से हंसने लगी।
बच्चा दूर में अपनी मां को हंसता देखता है तो हैरान रह जाता है, तुरतं उड़ कर मां
के पास आ जाता है और पूछता है ‘आप इतने जोर जोर से क्यों हंस रही हैं?’ मां कहती है ‘बेटा ये असली
इंसान नही हैं, ये तो लकड़ी के पुतले हैं जिन्हें इंसान ने हमें डराने के लिए खेत
में लगा रखे हैं।’
रखवालों की हकीकत जान कर बच्चा भी हंसने लगता
है। मां उसे समझाते हुए कहती हैं कि ‘जीवन में कभी भी समस्या आये तो उससे भागना नही
चाहिए बल्कि उसे हल करने का प्रयास करना चाहिए।’
फिर मां और बच्चा
पेट भर कर अनाज खाते हैं और अपने घर की ओर चल पड़ते हैं।

So sweet ...I love birds ...I wish I was a bird
ReplyDeleteme too
Deletecute and funny story,reminds us of the old saying "dar ke aage jeet hai"
ReplyDeleteशुक्रिया
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