उपासना बेहार
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जोसेफ और उसकी
बहन मरियम के स्कूल में गर्मी की छुट्टी होने वाली थी. दोनों बच्चों ने
जिद्द पकड़ ली कि इस बार छुट्टीयों में वो शहर से बाहर घूमने जायेगें. जोसेफ के माँ-पापा ने सोचा कि 'बच्चे अपने मामा के गाँव कभी नहीं गए हैं. इस बार घूमने वहाँ चले जायें.' बच्चों के मामा
समुद्र के किनारे बसे एक गाँव में रहते थे. वो उन्हें लेने आये
थे. मामा के भी उन्ही के हमउम्र बच्चे थे. दो दिन में ही बच्चों
की आपस में दोस्ती हो गयी. चारों बच्चे दिन भर गाँव में इधर उधर फिरते रहते.
एक दिन शाम के
समय वो सभी समुद्र के किनारे घुमने गए. जोसेफ और मरियम
ने कभी समुद्र नहीं देखा था. वो दोनों विशाल समुद्र को देख कर हैरान रह गए, दूर दूर तक केवल
पानी ही पानी, किनारा भी नहीं दिख रहा था. रात होने लगी थी तभी
उन्होंने देखा कि समुद्र के बीचों बीच एक लाइट जल रही थी. जोसेफ चकित हो
गया कि हवा में लाइट कैसे लटकी है. उसने अपने ममेरे
भाई पीटर से पूछा “भैया ये लाइट समुद्र के बीचो
बीच कैसे लटकी है?” जोसेफ की बात सुन कर पीटर को खूब हंसी आई, उसने कहा “जोसेफ ये लाइट हवा में नहीं
लटकी है बल्कि समुद्र के बीच में लाइटहॉउस है जहाँ से ये रौशनी आ रही है.” “ये लाइटहॉउस क्या
होता है?” “लाइटहॉउस एक लम्बा टावर होता है जो समुद्र के बीच
होता है इसके चोटी पर बहुत पावरफुल लाइट होती है. जो बहुत दूर से
दिखाई देती है. ये लाइट जहाजों को एक दूसरे से टकराने से बचाता है और उनको
रास्ता दिखाता है.” मरियम ने पूछा “तो क्या लाइट जलाने के
लिए रोज किसी को नाव से वहाँ जाना पड़ता है?” “ नहीं मरियम, वहाँ लोग रहते
हैं जो रोज लाइट जलने और बंद करने का काम करते हैं.” “क्या हम वहाँ जा
सकते हैं?” “ इसके लिए तो पापा से बात करनी पड़ेगी. वो ही हमें वहाँ
ले जा सकते हैं” पीटर ने कहा.
दूसरे दिन बच्चे
मामा जी के पीछे पड़ गए. तब मामा जी बच्चों को बोट से लेकर लाइटहॉउस पहुँचे. जोसेफ और मरियम
ये देख कर हैरान हो गये कि यहाँ तो बहुत सारे लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं और यहाँ शहर जैसी सुविधा भी है. बच्चे उस जगह आ कर
बहुत रोमांचित हुए.
वहाँ काम करने वाले एक अंकल उन्हें सीढियों से
ऊपर लाइटहॉउस के उस भाग में ले गये जहाँ वो बड़ी बड़ी लाइटें लगी थी जो उन्हें गाँव से
दिखती थी. अंकल ने उन्हें बताया कि लाइट कैसे काम करती है. बच्चे ये जान कर
आश्चर्य चकित थे. बच्चे जब घर वापस आये तो सबसे पहले जोसेफ ने अपने माँ-पापा को फ़ोन लगा कर
लाइटहॉउस के बारे में जल्दी जल्दी सारी बातें बतायी. बच्चे मजे में है
ये जान कर उन्हें भी ख़ुशी हुयी.
जोसेफ और मरियम के माँ-पापा ने सोचा कि अब हर
साल छुटटीयों में वो कोशिश करेगे कि बच्चों को नई नई जगह ले जायें या भेजें जिससे
वो नई नई बातें जान और समझ सकेगें.

Very informative story ..nice one Upasana
ReplyDeleteशुक्रिया मनोज भाई
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